जग
ने ठुकराया है प्रभु जी
तुम
भी क्या ठुकराओगे
जैसा
भी हूँ शरणागत हूँ
अधम
रहा हूँ बड़ पापी हूँ
दोष
सभी
स्वीकार है
क्षमा
करो प्रभु शरण में ले लो
आप का बस
आधार है
विपदा
से अब धैर्य चूकता
बोलो
ना कब आओगे
तरस
न अब भी खाओगे
प्रारब्धों
का फल पाया
हूँ
छल
ही छल औ दुःख पाया हूँ
अंतिम
आस तुम्हारे द्वारे
नाम
तुम्हारा ही गाया
हूँ
दुःख
के बादल घेर लिए हैं
सुख
के दिन कब लाओगे
तरस
न अब भी
खाओगे
जगत
खेवइया तुम बड़ भइया
पिता
तुम्हीं सर्वेश्वर
हो
एक
अभिलषित कृपा तुम्हारी
इष्ट
तुम्हीं मेरे ईश्वर हो
धाय
गरुड को ले आये थे
मेरे
लिए
कब
धाओगे
तरस
न अब भी खाओगे
अमंगल
को मंगल कर दो
पीड़ा
हर दुःख सुख कर दो
हे
महावीर भुजा को थामों
अपनी
कृपा से तर कर दो
जब
भी आओगे प्रभु मुझको
निज
चरणों
में पाओगे
तरस
न अब भी खाओगे
पवन
तिवारी
१९/०३/२०२५
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