यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

हनुमत दुखवा हरो हमार


 

 अंजनि मइया करें दुलार

सीता मइया करें हैं प्यार

रघुनंदन  है तात तुम्हार

सूर्य पुत्र  के   तारणहार

संकट मोचन नाम तुम्हार

सबका  बेड़ा  करते  पार   

तुम्हें   पुकारूँ  बारम्बार

हनुमत दुखवा  हरो हमार

 

जो जग भर के रहे उबारक

नागपाश   से  उन्हें उबारे

जो छल छंद का रहा पुजारी

ऐसे  कालिनेमि  को  मारे

तारन  हारो  को  भी तारे

हम आये हैं द्वार  तुम्हारे

दुःख  से  मिलता नहीं है पार

हनुमत दुखवा हरो हमार

 

मैनाक को  तुम्हीं हो तारे

तुम्हीं  लंकिनी को हो मारे

तुम्ही अक्ष कुमार को मारे

कितने ही  निशचर  संहारे

अहिरावन को तुम्हीं हो मारे

सुर नर मुनि को तुम्हीं उबारे

अपना  भी  दुःख  अपरम्पार

हनुमत  दुखवा  हरो   हमार

 

तुम्हरे  नाम  पुकारें राम

उर में  बसें  जानकी राम

तुम्हीं बनाओ बिगड़े काम

संकट मोचन तुम्हरा नाम  

तुलसी तुमसे  पाए  धाम

हमें सहारा  तुम्हरा  नाम

उलटी है जीवन  की  धार

हनुमत दुखवा हरो  हमार   

            

पवन तिवारी

२/०१/२०२६ दोपहर दो बजकर ५ मिनट पर रचित


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