सीता मइया करें हैं प्यार
रघुनंदन है तात तुम्हार
सूर्य पुत्र के तारणहार
संकट मोचन नाम तुम्हार
सबका बेड़ा करते पार
तुम्हें पुकारूँ बारम्बार
हनुमत दुखवा हरो हमार
जो जग भर के रहे उबारक
नागपाश से उन्हें उबारे
जो छल छंद का रहा पुजारी
ऐसे कालिनेमि को मारे
तारन हारो को भी
तारे
हम आये हैं द्वार तुम्हारे
दुःख से मिलता नहीं है पार
हनुमत दुखवा हरो हमार
मैनाक को तुम्हीं हो तारे
तुम्हीं लंकिनी को हो मारे
तुम्ही अक्ष कुमार को मारे
कितने ही निशचर संहारे
अहिरावन को तुम्हीं हो मारे
सुर नर मुनि को तुम्हीं उबारे
अपना भी दुःख अपरम्पार
हनुमत दुखवा हरो हमार
तुम्हरे नाम पुकारें राम
उर में बसें जानकी राम
तुम्हीं बनाओ बिगड़े काम
संकट मोचन तुम्हरा नाम
तुलसी तुमसे पाए धाम
हमें सहारा तुम्हरा नाम
उलटी है जीवन की धार
हनुमत दुखवा हरो हमार
पवन तिवारी
२/०१/२०२६ दोपहर दो बजकर ५ मिनट पर रचित
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