यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

भूल नहीं पाता हूँ



भूल नहीं पाता हूँ

लौट लौट आता हूँ

दूर - दूर जा करके

गाँव तुझे गाता हूँ

 

तू भी नहीं वैसा है

वो न तेरे जैसा है

नहीं एक सा कोई  

प्यार एक जैसा है

 

गाँव तू न गाँव रहा

मिटटी में न पाँव रहा

तू भी हुआ शातिर ना

सच्चों का ठाँव रहा

 

वहां थोड़ा पैसा है

सब जानें कैसा है

तुझसे ठीक है अब तो

शहर शहर जैसा है

 

फिर भी कुछ बचा तुझमें

और कुछ बचा मुझमें

जोड़ हमें देता है

तू मुझमें मैं तुझमें

 

मिट्टी का नाता है

तू मुझमें गाता है

भूल जाऊं दिन में जो

सपने में आता है

 

पवन तिवारी

५/०२/२०२६

 


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