यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

कैसे - कैसे लोग आये



कैसे - कैसे लोग आये

ज़िन्दगी में जोग आये

पकड़  करके हाथ मेरा

दूर  जाकर छोड़ आये

 

रास्ते में जल्दी जल्दी

बड़े - छोटे मोड़ आये

कितने ही राही मिले औ

कितने रिश्ते जोड़ आये

 

इन्हीं  रिश्तों  के  सहारे

कष्ट  कितने  भोग आये

उस डगर से बच तो आये

किन्तु  कितने  रोग लाये

 

जिंदगी  को  ओढ़ना था

और दुःख को ओढ़ आये

रिश्ते जो भी खून के थे

सारे हमको  छोड़  आये

 

ज़िन्दगी  जाने लगी जो

पास  उसके  दौड़  आये

मृत्यु से उसका मिलन था

साथ खुद को  जोड़ आये

 

पवन तिवारी

०८/१२/२०२५   

 

    


2 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसे ही लोग आते हैं आजकल क्या कहें और।
    सादर।
    --------
    नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शनिवार ३ दिसम्बर २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    नववर्ष मंगलमय हो।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. क्षमा चाहेंगे,कृपया ३ दिसम्बर को ३ जनवरी पढ़े।
      सादर।

      हटाएं