यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

मंगलवार, 16 जुलाई 2019

प्यार में दिल से बड़े


प्यार में दिल से बड़े लाड से खिलाती है
आती जब अपने पे है तो बड़ा रुलाती है

जब भी  वो मिलती है बोलते शरमाती है
मगर जब होश में आती है सब बताती है

मौत  शातिर है  आती है  हर बार मगर
आगे रखता हूँ ग़ज़ल और उलझ जाती है

उसकी जिद नखरे और गुस्सा उसका एक तरफ
मगर खुश होने पर खुद की हँसी उड़ाती है

हमीं सही हैं जी जुमले के इस जमाने में
वही है एक जो खुद को सजा  सुनाती है

पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – poetpawan50@gmail.com  

सोमवार, 15 जुलाई 2019

उस गली से वो


उस गली से वो क्या जाने आने लगे
बेसुरे भी गली  के  गुनगुनाने  लगे

आया दुःख तो हुनर कुछ ऐसा दिया
रोते - रोते ही हम ग़ज़ल गाने लगे  

आखिर  ऐसा  हुनर  भूख देकर गयी
अपने गम से ही खुद हम कमाने लगे

क्या  कहूँ  अपनी ही शर्म के बारे में  
खुद से खुद मिलने में ही जमाने लगे

अपनी अदा, हुनर के बारे में क्या कहूँ
कितने ही  बिन बुलाये चले आने लगे

साहब नहीं रहा बस इतना ही सुन के
दोस्त  भी  चुपचाप उठ के जाने लगे

पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – poetpawan50@gmail.com

शनिवार, 13 जुलाई 2019

प्रेम में बस स्वार्थ की ही वर्जना है


प्रेम  में  स्वार्थ की केवल वर्जना
प्रेम ही हृदय की सविनय गर्जना
प्रेम के प्यासे मानव नहीं देव भी
प्रेम  उदात्त  है  अप्रतिम अर्चना

प्रेम का रूप जल और सरिता, धरा
प्रेम  लौकिक भी है प्रेम है अपरा
जग भी तो प्रेम का एक अनुबंध है
जग में समृद्ध वही प्रेम जिसका खरा

प्रेम क्या है सुनो आम धनश्याम है
प्रेम  वाला  सुखी  आठों  याम हैं
प्रेम  धन  से खरीदा नहीं जा सके
प्रेम  का  प्रेम  ही  केवल दाम है

डाह के रोग को  प्रेम ने मारा है
मीराबाई  को भी प्रेम ने तारा है
प्रेम की चाह में देव भी तडपे हैं
प्रेम पावन परम गंग की धारा है

प्रेम  सारे  कलुष को भी हर लेता है
सारे  आनन्द  जीवन में भर देता है
जग से मुक्ति का भी प्रेम ही मार्ग है
प्रेम जीवन  की हर नाव को खेता है
पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८

अणु डाक – poetpawan50@gmail.com


पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – poetpawan50@gmail.com

सोमवार, 8 जुलाई 2019

पास उनको नहीं बुलाना है


पास  उनको  नहीं  बुलाना है
प्यार फिर भी मगर जताना है
सोचता   हूँ   करूँ  कैसे  मैं
लगता है आँखों से निभाना है

घर पे उनके तो आना  जाना है
बिन कहे  उनका प्यार पाना है
नेह  का अस्त्र  विनम्रता लेकर
अपना  कुछ इस तरह बनाना है

प्रेम  में  मौन  प्यारी  भाषा है
और  विश्वास  ऊँची  आशा  है
चाहना  चाह  किन्तु  ना रखना
वरना  होती  बड़ी   निराशा  है

प्यार नाजुक कि जैसे धड़कन है
जरा  सी  चोट से भी तड़पन है
प्रेम  पर  हो गये समर्पित यदि
फिर तो जीवन ही सारा उपवन है


पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – पवनतिवारी@डाटाबेस.भारत

शुक्रवार, 5 जुलाई 2019

मित्र


जो भी मिलता  है  बताते मित्र हैं
पता चलता दुःख में वे तो चित्र हैं
मित्र परिचित  में किये अंतर नहीं
वे हैं  केवल  गंध  मित्र तो इत्र हैं

परिचितों को मित्र कह फँसते रहे
और  मौकों  पर  वही हँसते रहे
मित्र केवल  उँगलियों पर होते हैं
शेष मौकों  पर तो बस डसते रहे

कहने  को  वैसे तो मित्र हजार हैं
किन्तु सच में होते बस दो-चार हैं
बिन कहे  माँगे सदा जो साथ हो
कहो ना कहो वो ही सच्चा यार है

इसका ना कोई रक्त से सम्बन्ध है
ये तो  निज के प्रेम का अनुबंध है
जब कोई सम्बन्ध काम आता नहीं
मित्र  आकर करते सब ही प्रबंध हैं

पवन तिवारी
संवाद - 7718080978
अणु डाक – poetpawan50@gmail.com


मैं रेत तू नदी है


मैं    रेत    तू    नदी     है
मैं   लम्हा   तू   सदी   है
तुझे खुद से ज्यादा चाहूँ
नेकी   है    या    बदी   है

मैं    तार     तू   सितार
नाचीज़   मैं  तू    प्यार
तुझे  नाम   दूँ मैं क्या
तुझे इश्क कहूँ या यार

मैं   काँटा    तू    गुलाब
तू  सबके लिए   शबाब
तुझमें है जिन्दगी मेरी
मैं  कीच    तू है  आब

मैं  छत  हूँ   तू   दीवार
मैं    बेचैनी    तू  क़रार
मेरी  हस्ती  भी  बने 
जो कर  ले  अंगीकार 

पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – poetpawan50@gmail.com

मंगलवार, 2 जुलाई 2019

लिखते होंगे बे - बहर हम


लिखते  होंगे  बे - बहर हम किन्तु बहरे हम नहीं
वैसे तो ग़म हैं बहुत पर ग़म का हमको ग़म नहीं

चीज  हो  तो  बदल दें किरदार बदलते नहीं
जो कि अंदर से हैं वैसे जाते उनके खम नहीं

लाशों  पे  लाशें फ़कत चुपचाप वो देखा किया
आदमी कहता है खुद को और आखें नम नहीं

होता उनसे कुछ नहीं जो कहते हैं कुछ इस तरह
हम  दिखाते हैं उसे अब  वरना हम भी हम नहीं

हो गये  इतिहास कितने हम ही ज्यों के त्यों रहे
और  कहते  सिरफिरे  भारत  में कोई दम नहीं  

तुम  रहो  आगे  मगर  अपना भी इक अंदाज है
बात हो जब सादगी की फिर पवन कुछ कम नहीं



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक -  poetpawan50@gmail.com

साई के दर पर जाना है


साई  के  दर  पर  जाना है
झोली को भर कर लाना है
और    क्या   देखना   कहीं
अपने  साई  का जमाना है

सारा जग उनका दीवाना है
हम  भी  उनका मस्ताना है
साई     की    बात   निराली
दया   का  साई  खजाना  है

जो   उसके   दर  पर आया
जो   चाहा   वो  सब   पाया
उसे   सब  कुछ  हासिल  है
साई  का   जिस  पर  साया

सबके    लिए    तेरी    राहें
खुली    सदा     तेरी    बाहें
शरण    जो   तेरी     आये
उसपे    तेरी  वारी  निगाहें

पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – poetpawan50@gmail.com