यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

शनिवार, 22 अगस्त 2026

तेरी मेरी कहानी है


 

बिगड़ी बिगड़ी कहानी है

चार आँखों में पानी है

धोखा छल है मिला दोनों को

मैं न राजा तू रानी है

 

एक जैसी कहानी है

तेरी मेरी कहानी है.

 

रौंदी अपनी जवानी है

दुःख भरी ज़िंदगानी है

दर्द किसका कहें गहरा है

दोनों ने ख़ाक छानी है

 

एक जैसी कहानी है

तेरी मेरी कहानी है

 

 

 

दुःख की लम्बी रवानी है

फिर भी जीने की ठानी है

ज़ालिमों के न आगे झुके

हार हमने न मानी है

 

एक जैसी कहानी है

तेरी मेरी कहानी है

 

जानी जानी कहानी है

रंग दोनों का धानी है

हँसना रोना तो अब साथ है

हाय कैसी दिवानी है

 

एक जैसी कहानी है

तेरी मेरी कहानी है

 

आख़िरी सच यही यार है

मौत सबको ही आनी है

एक दूजे के जैसे हैं हम

पानी के जैसी छानी है

एक जैसी कहानी है

तेरी मेरी कहानी है

 

ज़िंदगी अपनी लानी है

इस जनम में ही गानी है

मरते मरते हँसी ज़िंदगी

चादर सच की तानी है

 

एक जैसी कहानी है

तेरी मेरी कहानी है

 

पवन तिवारी

२१/८/२०२६


इस रचना का भाव उपन्यास ‘पतिव्रता वेश्या’ के नायक और नायिका के आत्मकथ्य सुनाने के भावनात्मक दृश्य से उपजा और फिर रचा गया. यह रचना कतिपय कारणों से उपन्यास का हिस्सा नहीं है.