पवन
से चालक बालक थे तुम
दिन
में दिवाकर लील लिए थे.
देख
पराक्रम जग विस्मित तब
इंद्र
प्रताप को ढांप लिए थे.
राहु
तो भय से भाग गयो प्रभु
काल
का रूप दिखाय गये थे
तुमपे
वज्र चलाये जो इंद्र तो
हनुमत
नाम धराय लिए थे
बालपने
परताप प्रभू ऐसो
जग
भर को भरमाय लिए थे
मारे
मारे फिरते सुगरीव को
मित्र
बनाय उबार लिए थे
राम
से मैत्री कराय प्रभु तुम
पम्प
राज दिलाय दिए थे
करि
उपकार विभीषन को प्रभु
लंका
राज दिलाय दिए थे
सीता
की सुधि ले प्रभु तुम
राम
को आस जगाए दिए थे
राम
जी तात कहें तुमको
भरतहिं
सम भाई बनाय लिए थे
जो
जग में भी असम्भव रहा प्रभु
वो
सब सरल बनाय दिए थे
गरुड
पछाड़े अहि को मारे
पंच
स्वरूप दिखाय दिए थे.
अक्ष
कुमार संहार दिए थे
रावण
गर्व किये प्रभु खंडित
स्वर्ण
पूरी को जलाए दिए थे
राम
अखंड अयोध्या दिए प्रभु
राजा
स्वरूप सुभाय रहे हो
जो
जग में भी हैं दीन दुखी प्रभु
आप
उन्हीं के सहाय रहे हो
पवन
तिवारी
०४/०४/२०२६