चवन्नी का मेला

यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

शनिवार, 4 अप्रैल 2026

पवन से चालक बालक थे तुम



पवन से चालक बालक थे तुम

दिन में दिवाकर लील लिए थे.

देख पराक्रम जग विस्मित तब

इंद्र प्रताप को ढांप लिए थे.

राहु तो भय से भाग गयो प्रभु

काल का रूप दिखाय गये थे

तुमपे वज्र चलाये जो इंद्र तो

हनुमत नाम धराय लिए थे

 

बालपने परताप प्रभू ऐसो

जग भर को भरमाय लिए थे

मारे मारे फिरते सुगरीव को

मित्र बनाय उबार लिए थे

राम से मैत्री कराय प्रभु तुम

पम्प राज दिलाय दिए थे

करि उपकार विभीषन को प्रभु

लंका राज दिलाय दिए थे

 

सीता की सुधि ले प्रभु तुम

राम को आस जगाए दिए थे

राम जी तात कहें तुमको

भरतहिं सम भाई बनाय लिए थे

जो जग में भी असम्भव रहा प्रभु

वो सब सरल बनाय दिए थे

गरुड पछाड़े अहि को मारे

पंच स्वरूप दिखाय दिए थे.

 

 बाग़ अशोक उजाड़ किये प्रभु

अक्ष कुमार संहार दिए थे

रावण गर्व किये प्रभु खंडित

स्वर्ण पूरी को जलाए दिए थे

राम अखंड अयोध्या दिए प्रभु

राजा स्वरूप सुभाय रहे हो

जो जग में भी हैं दीन दुखी प्रभु

आप उन्हीं के सहाय रहे हो

 

पवन तिवारी

०४/०४/२०२६

  


गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

दूध भात खाओ बेटा आओ हनुमान



दूध भात खाओ बेटा आओ हनुमान

राम राम गायें  बेटा  आओ हनुमान

 

खालो बेटा लायी लाल ताजे ताजे फल

आओ पिला दूँ बेटा सरयू जी का जल

अपनी माँ का भी बेटा रख लो थोड़ा मान

दूध भात खाओ  बेटा  आओ हनुमान

 

लोग तुम्हें कहते हैं बड़े हो महान

रात दिन गाते हो राम जी की शान

आज जनम दिन तुम्हरा माँ की है आन

दूध भात खाओ बेटा आओ हनुमान

 

तुम्हरी  नज़र  उतारें  लेके  राम नाम

तुम्हरे पे किरपा करें रघुकुल के राम

मइया तुझे याद करे रोज़ सुबह-शाम

दूध भात खाओ  बेटा आओ हनुमान

 

सुना तुम्हरे नाम पे अयोध्या में धाम

कहते हनुमान  गढ़ी  तुम्हरा है धाम

दुखियों के बिगड़े बनाओ बेटा काम

सुन  के  गर्व  होता  है आंजनेय नाम


तुमसे ही मिला  बेटा  माँ को सम्मान

दूध भात खाओ बेटा आओ  हनुमान

 

तुम्हरा जनम  दिन है पूनम का चान

सारा जगत गाये बेटा तुम्हरा ही गान

तुम गाते रहना  बेटा सीता राम नाम

खुश रहो फूलो  फलो  जियो हनुमान

 

दूध भात खाओ बेटा आओ हनुमान

राम - राम गायें  बेटा आओ हनुमान

 

पवन तिवारी

२/०४/२०२४

गुरुदेव महाराज हनुमान जी के प्रकटोत्सव पर चैत्र पूर्णिमा

 

 

 

 


शुक्रवार, 27 मार्च 2026

प्यार में हाय कैसे बहके थे



प्यार  में  हाय  कैसे बहके थे

भोर की चिड़ियों जैसे चहके थे

जाल  में  ऐसे  फँसे चुगते ही

हाय  फँसते  ही जैसे दहके थे

 

प्यार में दर्द मिलने वाला है

दर्द  भी  आह भरने वाला है

हाय क्या सोचा हो रहा क्या है

तड़प के  प्यार मरने वाला है

 

प्यार मधुमेह  सी  बीमारी है

इसमें तो दोनों तरफ आरी है

उसी ने चीर दिया है दिल को

जिसको कहते थे बड़ी प्यारी है

 

सलाह है कि प्यार मत करना

सबसे घातक है प्यार से डरना

दवा से घाव बाक़ी भर जाते

प्यार का घाव नहीं है भरना

 

खुद को बर्बाद कर लिया मैंने

हाय मीठा ज़हर पिया मैंने

इसका इलाज नहीं है कोई

भोग कर मशवरा दिया मैंने

 

पवन तिवारी

२७/०३/२०२६

 


मंगलवार, 24 मार्च 2026

किसी वाटिका में सुमन खिल रहा है



किसी वाटिका  में  सुमन खिल रहा है

कहीं दर्द से कोई   दिल   हिल रहा है

यहीं पर है खिलना यहीं पर झुलसना

इसी जग में सुख दुःख सभी पल रहा है

 

खिलौने की  ख़ातिर  कोई रो रहा है

कोई जो  खिलौनों को सर ढो रहा है

कोई  माल  पूए  में  कमियाँ गिनाये

कोई  भूख  से   ज़िंदगी  खो  रहा है

 

कहीं  कोई  संगीत  धुन बज रही है

वहीं पर कहीं कोई सिर धुन रही है

वहीं पास में कोई लड़ता - झगड़ता

वहीं  कोई  दुल्हन   विदा हो रही है

 

बिगड़ते - बिगड़ते  कोई बन रहा है

कोई थोड़ा चढ़ के अधिक ढल रहा है

ग़रीबों  ने  भी  पाल  रखे हैं सपने

उन्हीं सपनों पर कोई चढ़ बढ़ रहा है

 

तुम्हीं  से  तुम्हें छीनता  जा  रहा है

कोई  महुए सा  बीनता जा  रहा है

तुम्हें कुछ पता कुछ नहीं भी पता है

कि गिर गिर के उठ उठ बढ़ा जा रहा है

 

कि अपने पराये का भ्रम चल रहा है

किसी और का लेके गम चल रहा है

दुखी   दूसरों   में   खुशी  ढूंढ़ते   हैं

कहाँ हर किसी को ही सुख मिल रहा है

 

पवन तिवारी

२४/०३/२०२६  

  


मंगलवार, 3 मार्च 2026

मैदानों से चलकर पर्वत चढ़ते हैं



मैदानों से चलकर पर्वत चढ़ते हैं

वर्षा चाहें पर,  पानी  से  डरते हैं

उहापोह जीवन में ऐसे चलती है

करना चाहें और, और कुछ करते हैं.

 

झूठ के मटके रोज़ रोज़ हम भरते हैं

सच के खाली मटकों से भी चिढ़ते हैं

बढ़ने की कोशिश तो मात्र दिखावा है.

सच तो यह कि रोज़ ही थोड़ा ढहते हैं.

 

अवसरवादी धारा के संग बहते हैं

कहने वाले चाहे जो उन्हें कहते हैं

सच सोचे न लाभ हानि का गुणा गणित

सच वाले बस सच सच कहते रहते हैं.

 

जो सच्चे हैं जाने क्या क्या सहते हैं

तह तक जाने तक वे महते रहते हैं

यह जिद ही सच को सच सच कह पाती है

झूठे तो सच को भी झूठा कहते हैं

 

 पवन तिवारी    

२/०३/२०२६

  


बुधवार, 11 फ़रवरी 2026

तुम्हें जब से देखा यही सोचता हूँ!



तुम्हें जब से देखा यही सोचता हूँ!

तुम्हें अपना जीवन कलत्र चुनूँगा,

अगर शब्दों ने साथ मेरा दिया तो

तुम्हारी कहानी का काथिक बनूँगा

 

मेरा स्वप्न साकार जब से हुआ है

भला तुमसे  आभार  कैसे कहूँगा

मेरे दोषों की आवरा बन गयी हो

कहोगी  रुकुंगा,  कहोगी  बहूँगा

 

बड़े दोष पाये,  बड़े   छल  हैं  खायें

मगर अब है प्रत्यय कि सुख से रहूँगा

किसी से नहीं कह सका ऐसी बातें

कि उर कह रहा है तुम्हीं से कहूँगा

 

कि जबसे मिली हो मगन मन है रहता

कि हर सांस  कहती  तुम्हारी करूँगा

रहा अंक  में  तुम्हरे  सर यदि मेरा तो

जो यम आये तो हंसते - हंसते मरूँगा

 

पवन तिवारी ११/०२/२०२६  

 

  


शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

भूल नहीं पाता हूँ



भूल नहीं पाता हूँ

लौट लौट आता हूँ

दूर - दूर जा करके

गाँव तुझे गाता हूँ

 

तू भी नहीं वैसा है

वो न तेरे जैसा है

नहीं एक सा कोई  

प्यार एक जैसा है

 

गाँव तू न गाँव रहा

मिटटी में न पाँव रहा

तू भी हुआ शातिर ना

सच्चों का ठाँव रहा

 

वहां थोड़ा पैसा है

सब जानें कैसा है

तुझसे ठीक है अब तो

शहर शहर जैसा है

 

फिर भी कुछ बचा तुझमें

और कुछ बचा मुझमें

जोड़ हमें देता है

तू मुझमें मैं तुझमें

 

मिट्टी का नाता है

तू मुझमें गाता है

भूल जाऊं दिन में जो

सपने में आता है

 

पवन तिवारी

५/०२/२०२६

 


शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

कैसे - कैसे लोग आये



कैसे - कैसे लोग आये

ज़िन्दगी में जोग आये

पकड़  करके हाथ मेरा

दूर  जाकर छोड़ आये

 

रास्ते में जल्दी जल्दी

बड़े - छोटे मोड़ आये

कितने ही राही मिले औ

कितने रिश्ते जोड़ आये

 

इन्हीं  रिश्तों  के  सहारे

कष्ट  कितने  भोग आये

उस डगर से बच तो आये

किन्तु  कितने  रोग लाये

 

जिंदगी  को  ओढ़ना था

और दुःख को ओढ़ आये

रिश्ते जो भी खून के थे

सारे हमको  छोड़  आये

 

ज़िन्दगी  जाने लगी जो

पास  उसके  दौड़  आये

मृत्यु से उसका मिलन था

साथ खुद को  जोड़ आये

 

पवन तिवारी

०८/१२/२०२५   

 

    


हनुमत दुखवा हरो हमार


 

 अंजनि मइया करें दुलार

सीता मइया करें हैं प्यार

रघुनंदन  है तात तुम्हार

सूर्य पुत्र  के   तारणहार

संकट मोचन नाम तुम्हार

सबका  बेड़ा  करते  पार   

तुम्हें   पुकारूँ  बारम्बार

हनुमत दुखवा  हरो हमार

 

जो जग भर के रहे उबारक

नागपाश   से  उन्हें उबारे

जो छल छंद का रहा पुजारी

ऐसे  कालिनेमि  को  मारे

तारन  हारो  को  भी तारे

हम आये हैं द्वार  तुम्हारे

दुःख  से  मिलता नहीं है पार

हनुमत दुखवा हरो हमार

 

मैनाक को  तुम्हीं हो तारे

तुम्हीं  लंकिनी को हो मारे

तुम्ही अक्ष कुमार को मारे

कितने ही  निशचर  संहारे

अहिरावन को तुम्हीं हो मारे

सुर नर मुनि को तुम्हीं उबारे

अपना  भी  दुःख  अपरम्पार

हनुमत  दुखवा  हरो   हमार

 

तुम्हरे  नाम  पुकारें राम

उर में  बसें  जानकी राम

तुम्हीं बनाओ बिगड़े काम

संकट मोचन तुम्हरा नाम  

तुलसी तुमसे  पाए  धाम

हमें सहारा  तुम्हरा  नाम

उलटी है जीवन  की  धार

हनुमत दुखवा हरो  हमार   

            

पवन तिवारी

२/०१/२०२६ दोपहर दो बजकर ५ मिनट पर रचित


रविवार, 7 दिसंबर 2025

आज कल ऐसा हाल होता है



आज कल ऐसा हाल होता है

दिल अकेले में हो तो रोता है

यूँ तो महफ़िल में हँसता गाता है

दूसरों के भी गम को ढोता है.

 

आज कल ऐसा हाल होता है

रात जगता है दिन में सोता है

साथी बढ़ते ही जा रहे दिन दिन

और ए ज़िन्दगी को खोता है.

 

आज कल ऐसा हाल होता है

रात भर जग के सपने बोता है

एक ही बात कहता रहता है

आदमी है कि रट्टू तोता है

 

पवन तिवारी

०६/१२/२०२५