यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

सोमवार, 21 जून 2021

पहले मैं संध्या को आता

पहले मैं  संध्या को आता

सबसे पहले  दिया जलाता

दोनों में  अभिवादन  होता

दोनों का चेहरा खिल जाता

 

अब दोनों उदास मिलते हैं

ख़ुद में ही  दोनों जलते हैं

है अपराध बोध  दीपक को

मेरे  चुप से  वे  घुलते हैं

 

उसने मुझको  गलते देखा

अपनों द्वारा  छलते देखा

मेरे  चेहरे  की  आभा को

उसने  केवल  ढलते  देखा   

 

अब दीपक पे नज़र जो जाती

उसकी  लौ  मद्धम हो जाती

उसके लौ की सहज ही मस्ती

मुझे  देखते  ही  खो  जाती

 

खुद की करता खुद निंदा है

ज़रा - ज़रा सा ही ज़िन्दा है

षड्यंत्रों को  देख के चुप था

इसीलिये   वो   शर्मिंदा  है

 

पवन तिवारी

संवाद – ७७१८०८०९७८

३१/०७/२०२०

मैं हूँ रंग

मैं हूँ रंग तो तुम पिचकारी

कागज़ कलम सी अपनी यारी

नाव और पतवार सा रिश्ता

इक दूजे पर अपनी उधारी

 

तुम बिन मेरी अधूरी कहानी

मैं हूँ धान तो तुम हो पानी

तुम बिन तो अस्तित्व न मेरा

तुम संग ही जीवन की ठानी

 

बहुत ज़रूरी आज  है कहना

दूर नहीं अब  साथ है रहना

परिणय में इस प्रेम को बदले

प्रेम का ये  सर्वोत्तम  गहना

 

प्रेम से है हमें प्रभु तक जाना

प्रतिक्षण  हमें  नेह  बरसाना

अपने प्रेम से  बगिया  महके

कुछ  गायें  यूँ  प्रेम  तराना

 

पवन तिवारी

संवाद-७७१८०८०९७८ 

३०/०७/२०२०

गुरुवार, 17 जून 2021

गीतों को झुठलाने वालों

गीतों को झुठलाने वालों गीतों से ही धाम मिलेगा

पीड़ा के पाँवों को मेरे गीतों से आराम मिलेगा

लौट के एक दिन आओगे तुम धन की खातिर त्यागने वालों

दुःख की सर्दी जब घेरेगी इन गीतों से घाम मिलेगा

 

धन पाकर भी चिंता होगी मन का का कोई काम न होगा

सारा वैभव फीका होगा समय पर कोई काम न होगा

तब स्मरण मेरा आयेगा स्मृति का उपवन छायेगा

गीत लिए मैं खड़ा मिलूँगा और तो कोई नाम न होगा

 

जिस तन से था प्रेम किया जब उससे ही छल पाओगे

हँसने वाले घर से ही जब रोते – रोते जाओगे

बहते आँसू सब देखेंगे कोई भी ना पोंछेगा

ऐसे में ये गीत तुम्हें और तुम गीतों को गाओगे

 

छल से हुए पराजित वीरों को मेरे गीत समर्पित होंगे

सीमा पर जो लिए तिरंगा गीत मेरे उन्हें अर्पित होंगे

एक दिन ये जग ढूंढेगा इस आवारा फक्कड़ को भी

मेरे गीतों से जन के दुःख गा गाकर के तर्पित होंगे

 

पवन तिवारी

संवाद – ७७१८०८०९७८

२९/०७/२०२०   

देके मुझे धोखा तुम

देके मुझे धोखा तुम धोखा ही पाओगे

धोखे को लेकर बताओ कहाँ जाओगे

 

जिसके लिए धोखा मुझे दे रही हो

सच सच बताओ क्या तुम सही हो

 

ज़िस्म चाहने वाले क्या तुमको चाहेंगे

रूह से ना मतलब है ज़िस्म तक ही थाहेंगे

 

सोचो जो पहले थे क्या तुम वही हो

प्यार छोड़ जिस्म के फरेब में बही हो

 

जानता हूँ देर से ही मगर पछताओगे

करके बरबाद मुझे मेरे पास आओगे

 

जमाने की नज़रों से रुसवा हो जाओगे

जिस्म वाले यारों से अपमान खाओगे

 

दर्द के बदले में तुम दर्द ही कमाओगे

दगा के बदले फ़कत दागा का धन पाओगे

 

इस क़दर आँख मेरी जितना बरसाओगे

खुद के आँसुओं में सनम तुम भी डूब जाओगे

 

पवन तिवारी

संवाद – ७७१८०८०९७८

२५/०७/२०२०  

बुधवार, 16 जून 2021

तुम आत्महत्या मत करना

तुम आत्महत्या मत करना!

क्योंकि, मैंने भी आत्महत्या नहीं की!

जब दुनिया ने,

मेरे अपनों ने,

भेजा था मेरे पास

आत्महत्या को,

तो मैंने पूछा था,

मुझे क्यों ले जाना चाहती है अपने साथ?

उसने कहा था;

तुम हार मान गए हो जिंदगी से!

जो जिंदगी के रहते,

जिंदगी नहीं मानते!

उन्हें ले जाती हूं अपने साथ !

तुम्हारे अपनों ने ही तो कहा-

तुम हार गए हो!

मैंने कहा- मैंने तो नहीं कहा!

मैं तुम्हारे साथ

एक शर्त पर चल सकता हूं।

क्या तुम मेरे कुछ प्रश्नों का उत्तर दे सकती हो ?

उत्तर! उसने हंसते हुए कहा- हां, पूछो-

अभी भी तुममें प्रश्न करने का साहस है!

मैंने कहा- क्या तुम्हारे साथ चलने के बाद

मेरे देखे हुए अधूरे सपनों को पूरा करोगी ?

मेरे माता-पिता और मुझ पर

आश्रितों का रखोगी खयाल!

तो मैं चलूंगा ।

वह फिर हंसी और बोली- तुम्हारे सपने

मैं क्यों पूरे करूंगी ?

तुम्हारे आश्रितों का खयाल मैं नहीं रखूंगी ।

यह मेरा काम नहीं,

फिर मैंने हंसते हुए कहा- फिर तुम,

गलत आदमी के पास आई हो!

मैं तुम्हारे साथ नहीं चलूंगा।

"मैं आत्महत्या नहीं करूंगा"

मैं जियूँगा, अपने अधूरे सपनों के लिए!

उन्हें पूरा करूंगा।

जो थोड़े ही सही, मेरे हैं !

उनके लिए लडूंगा और

जिन्होंने तुम्हें भेजा है मुझे हारा हुआ कहकर;

उन्हें कहना हारा हूं, मरा नहीं,

हारा हुआ भी हरा सकता है बस,

हौसला बनाए रखे।

आत्महत्या मेरी बात सुनकर

मुंह बना कर लौट गई और

आज मैं अपने सपनों को पूरा करके

दूसरों के सपने पूरा कर रहा हूं

इसलिए तुम उससे प्रश्न पूछना!लड़ना,

अपने सपनों के बारे में सोचना और आगे बढ़ना

"तुम आत्महत्या मत करना"

 

पवन तिवारी

सम्वाद – 7718080978

 

26/07/2020

 

सच्चा प्रेम तो धवल - धवल है

सच्चा प्रेम तो धवल - धवल है

धड़कन की गति  गंगा जल है

ध्यान लगाओ  हिय की भाषा

यमुना की कल कल कल कल है

 

यदि सच पावन प्रेम हो ऐसा

तब सब होगा स्वर्ग के जैसा

ऐसे  में  सब  देव  मिलेंगे

जो   चाहोगे   होगा  वैसा

 

प्रेम शची  है  प्रेम  सती है

प्रेम की  सबसे तीव्र गती है

ईश्वर को भी प्रेम है प्यारा

सच में वो  ही  प्रेमपती है

 

पूजा मान प्रेम  तुम करना

श्रद्धा रखना किन्तु न डरना

प्रेम तो फिर आनन्द ही देगा

प्रेम से सबकी झोली  भरना

 

पवन तिवारी

संवाद – ७७१८०८०९७८

२७/०७/२०२०

 

हे बादल! जब तुम गाते हो

हे बादल जब तुम गाते हो

जल का स्वर तुम बरसाते हो

जग कहता उसे बरखा रानी

गाकर तुम खुश कर जाते हो

 

जग कल्याण हेतु तुम गाते

ऐसा ह्रदय कहाँ से लाते  

इस स्वारथ की दुनिया का भी

जल गीतों से प्यास बुझाते

 

तुम नभ धरा के सच्चे गायक

तुम जीवन के अच्छे नायक

तुम जैसे कुछ गाने वाले

हो जाएँ तो हो सुखदायक

 

हे नीरद तुम पावन नीरज

परहित का आशीष मिले रज

हे घन देव तुम्हें वन्दन है

यूं ही गाते रहें अरज है

 

पवन तिवारी

संवाद - ७७१८०८०९७८

२८/०७/२०२०

आशाओं तुम गीत सुनाओ

आशाओं तुम गीत सुनाओ

साहस  मेरी  बाँह बढ़ाओ

मैं हँसते हुए  बढ़ना चाहूँ

धीर ह्रदय को तुम समझाओ

 

दुःख तुम गीत ख़ुशी के गाओ

हे तनाव  तुम  भी मुस्काओ

संघर्षों  का  मान  बढ़ा  दो

उदासियों   बाँसुरी   बजाओ

 

कान मेरे बस अच्छा सुनना

आँख प्यार की भाषा गुनना

फिर मन हँसी ख़ुशी से रहेगा

पग-पग पर है जीवन चुनना

 

अभिलाषाओं नम्र बनो तुम

थोड़ा–थोड़ा दिल की सुनो तुम

मैं  जीवन  को  गाना चाहूँ

सुंदर सा  संगीत  बुनो तुम

 

पवन तिवारी

संवाद – ७७१८०८०९७८

२८/०७/२०२०