यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

सामान जो लेना

सामान  जो  लेना  तो  दो चार  देखना
दुश्मन कसम भी खाए तो कई बार देखना

विश्वास जिनमें था वही फैला रहे हैं भ्रम
उल्लू भी बना  सकता  समाचार  देखना

दंगे फसाद घूस  औ व्यभिचार की खबरें
अच्छा नहीं  सबेरे  अब  अखबार देखना

इकरार  पर  ही ऐतबार  कर नहीं लेना
आखों में झाँक करके उसका प्यार देखना

उम्र  भर  दोस्ती  चलती है बहुत कम
यारी में  कभी  भी  न कारोबार देखना

इजहार से फक्त ही नहीं बनती बात है
अंदाज  देख पहले फिर इज़हार देखना

बनती हुई भी बात बिगड़ जाती है पवन
कहने  से  पहले उसका किरदार देखना



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८    


शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020

नये युग में भारत


नये युग में भारत भइया मुश्किल बचाना है
नया  रंगरूट  पूरा  सहर  का  दीवाना  है


लड़के सब ब्वाय हो  गये प्रेमिकाएं गर्लफ्रैंड
बाबू जी डैड  हो गये भाई  ब्रो  एण्ड एण्ड
ऐसे में तो भारत की झलक भी खो जायेगी
ऐसों को क्या पता जी लोक  गीत गाना है


सहर का जादू टोना गाँव तक चला आया
गाँव के ही लौंडे बोले सहर हमको जाना है


भारत की जड़ है देसी  देसी गर लाना है
देसी आम देसी  गाय को भी  बचाना है
बचाना है देसी महुआ आम का अचार भी
तभी थोड़ा–थोड़ा भारत लौट करके आना है


संस्कृति  बचाते  हुए  गाते मुस्काते हुए
देसी ही ढंग से हमें दुनिया पर  छाना है


धोती बचाना होगा अंगोछा  भी लाना होगा
आँगन में गौरैया को दाना  चुगाना  होगा
चमकाना  दांत  होगा  नीम के दातुन से
गोबर से घर में फिर से लेपा लगाना होगा


देसी  उपायों  से ही  प्रकृति  बच  पायेगी
माटी की  दियली  से  दिवाली  मनाना है


दादी नानी वाले किस्से हँस के सुनाना होगा
मेला और सावन झूला निश्चित बचाना होगा
अपनी ही संस्कृति से  अपनी पहचान है जी
देसी पहचान अपनी  सबको समझाना  होगा


चाँद और मंगल पाया दुनिया में भारत छाया
अपने  ही  ढंग  से  हमें  बुद्ध शुक्र जाना है


खटिया के  साथ कुआँ तुलसी भी लानी होगी
पोखर तालाब  की  भी इज्ज़त  बचानी होगी
फिर से  सजाना  होगा  खेतों में  खाद गोबर
हमको यदि भारत वाली चाहिए जिंदगानी होगी


उनकी  स्टाइल  अपनी, है  अपना  तेवर  भी
हम क्या हैं अपने  ढंग  से जग को बताना है


हमको विज्ञान चाहिए पर देसी  मान  चाहिए
असली भारत को भारत वाला सम्मान चाहिए
हमको सामान चाहिए अपनी जरूरत भर  का
शिवरात्रि वाले हमको फक्कड़  भगवान चाहिए


उनके विज्ञान अपने और अनुसन्धान  अपने
अपने  आयु वेद से भी  उनको  मिलाना है


अंग्रेज  वाली  इसे   इंडिया   बनाओ   ना
उन्नति के नाम पर जी विकृति ले आओ ना
भ्रष्ट बनाओ  नहीं  भारत  की संस्कृति को
आओ जी भारत  वालों गाँव को  बचाओ ना


उनका  अनुसरण  करके कीमत  चुकाई है
स्वच्छन्दता वाली हमे संस्कृति न लाना है


शिक्षा का माध्यम  अपनी  भाषा   बनाना है
रोजगार भी भारत की  भाषा   में  पाना  है
भाषा  बचेगी    तो   ही   भारत    बचेगा
हर   देशवासी   को  ये   सच   बताना है


मुश्किल है फिर भी हमको  भारत बचाना है
असली  भारत  है  देसी, देसी  ने  ठाना है



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८   


  

     



गुरुवार, 6 फ़रवरी 2020

वाग्देवी माँ सरस्वती


वाग्देवी  माँ   सरस्वती
शब्द  सर्जक   भगवती
उपमा रूपक बिम्ब शिल्प
छन्द  सुर  लय ना मती
सीधे - सीधे  याचना  माँ
कर  दो  हमरी  सद्गती

हूँ अबोध  दो बोध  माता
हर लो सारा कलेस माता
जो भी हैं उदगार हिय के
कह सकूँ मैं सुबोध माता
मूढ़ और  मतिमंद  हूँ मैं
हर लो सारा क्रोध  माता

दीप  सा  मैं  जल  सकूँ
संवाद  सबसे  कर  सकूँ
क्रोध  का  अनुवाद माता
प्रेम  से   मैं  कर  सकूँ
घाव  शब्दों से  लगे  जो
शब्दों  से  ही  भर  सकूँ

सत्य के लिए जर सकूँ
लोक हित में झर सकूँ
और मुरझाये अधर पर
हर्ष  थोड़ा   धर  सकूँ
राष्ट्र के मैं मान ख़ातिर
हर्ष  से  मैं  मर  सकूँ

आप की आया  शरण माँ
शुद्ध कर  दो आचरण  माँ
अहं द्वेष से बच  सकूँ मैं
सब कलुष का हो क्षरण माँ
संरक्षण  का  हूँ  अभिलाषी
प्रेम  का  दो  आवरण  माँ

हो विवेक का आगमन माँ
प्रज्ञा का बरसे सुमन  माँ
जो रचूँ हो  लोकहित  में
शेष का कर दो शमन माँ
राग  मुझ में  व्याप जाये
सब दिशा में हो अमन माँ

वन्दना  पूजा    अर्चन
ना ही जानू  मन्त्र  सर्जन   
श्लोक छन्द व नाही कीर्तन
मात्र   है    श्रद्धा   सुमन
सहज  सीधे  कर  रहा माँ
आप  को  शत  शत नमन


पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८


अंजलि लाल जी लाल- सवैया


अंजलि  लाल जी लाल  हुए जब लाल को देखि लगे  ललचाने
मातु से  आयसु  पाये जो लाल तो लाल की ओर बढ़े सर ताने
लाल जो  लाल  को धाय पड़ो तब  देखि के देव लगे  घबराने
लाल जो लाल को लील लियो तब छोटो सो लाल लग्यो हरसाने

लाल ने लाल ही लील लियो तब जग भर में फैलो अधिंयारो
देव दनुज मानव  सब धायो  इंदर  जी  कुछ  मार्ग निकारो
लाल को लाल बिना समझे  तब इंदर लाल को बज्र से मारो
लाल को देखि के लाल भयो तब वायु ने आपन क्रोध बघारो

वायु ने वायु को  थाम  लियो सब धाय पड़े प्रभु हाय उबारो
वायु कहे तब  वायु  चले जब लाल का मेरो जी भाग सँवारो
शेष  धनेश  सुरेश  महेश  सबै  मिलि वायु के लाल दुलारो
रिद्धिहि सिद्धिही सब गुणखान जी आसिस पे आसिस से वारो

ऐसे प्रतापी  मेरे  हनुमान जी जग  भर में  कीरति  फैलायो
राम जी राम भयो  तबहीं हनुमान जी राम के साथ में आयो
नाग की  पास हो या संजीवनि  संकट  से  हनुमान बचायो
ऐसे सकल गुणखान प्रभू जी को कोटिन कोटिन सीस नवायो



पवन तिवारी
संवाद - ७७१८०८०९७८


मंगलवार, 4 फ़रवरी 2020

किसी को चाहना


किसी को चाहना
या जग को चाहना
कि मिट्टी और
खुशबू को चाहना
चाहना प्रकृति को
चाहना किसी वस्तु को
चाह धन की भी
और भी बहुत कुछ चाहना
किन्तु चाहना स्वयं को
इससे बेहतर चाहत
और कुछ नहीं
जीना और जिंदादिल से
तो बस एक ही रास्ता
स्वयं को चाहना
और चाहते जाना



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८  

हंस है वाहन..... सवैया


हंस है वाहन बुद्धि प्रदायिनी, वत्सल  नेह  की मूरति  माता
इनकी शरण में जो भी आये ज्ञान का पुण्य  अशीष है पाता
करुणा की सागर शांति की देवी हैं, इनके अशीष से पूज्य हो जाता
मूरख  कालीदास  हो  जाता, जो  भी मातु  शरण में आता

मन  उज्ज्वल  है  तन  उज्ज्वल  ऐसी अपनी  बुद्धि की माई
मान  मिला  सम्मान  मिला  जिनके  घर द्वार  शारदा आई
मातु की महिमा जग विख्याता है सुर नर मुनि सब ने है गाई
मातु सरस्वती शत शत नमन है आप ने ज्ञान की ज्योंति जलाई

शब्द की देवी कृपा जो करैं, कविता  सविता सा प्रकाश करे हैं
शारदा माई में चित्त लगाये जो, तुलसी  सूर सा  नाम परे है
निर्मल मन  से  ध्याये उन्हें, तब वेद  पुराण का  कंठ धरे है
स्वर  संगीत कला  दमकै, जेहि  पर  माई  के  नेहि  झरे है


पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८



सोमवार, 3 फ़रवरी 2020

सुखकर्ता हैं..... सवैया


सुखकर्ता हैं, दुःखहर्ता हैं , ऐसे  गणेश  की गौरी  हैं माता
शुभ लाभ पुत्र हैं समृद्धि भरते, मंगल  के  सर्वस्व हैं दाता
रिद्धिहि सिद्धि हैं पत्नियाँ इनकी,सारी सिद्धियों के ये विधाता
कोटि नमन लम्बोदर जी को जिनका गुण जन जन है गाता

भूत पिशाच करें आराधन,  सर्व प्रथम  यही नाम  है आता
पूज्य प्रथम हैं लोक सकल में, जग इनकी धुन पर है गाता
वाहन मूषक ज्ञान प्रतीक है, प्रिय इनका है वो मोदक खाता
हर युग के अवलम्ब हैं गणपति, जो भी भजे हर सुख है पाता





पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८


रविवार, 2 फ़रवरी 2020

उमर का अहं


 वो जिनकी उमर पर  
बुढ़ापा शब्द जंचने लगता है
या उनके संबोधन में
बुढ़ापा शब्द होता जा रहा है चस्पा
या हो गया है स्थायी
वे उन सभी को मानने लगते हैं बच्चा
जिनकी उमर के साथ युवा, जवान या
प्रौढ़ शब्द जंचने लगता है
ऐसा नहीं कि उन्हें उनकी
उमर का नहीं है आभास


बस वे उन्हें अपने से
कमतर मानते हैं और
कह करके बच्चा
जताते हैं स्वयं को श्रेष्ठ
यह भी एक अहं की तुष्टि है
कुछ अपवादों का मिलना
लगता है अच्छा
पर अक्सर नहीं होते भाग्यशाली 
हाँ, कभी- कभी सार्वजनिक रूप से
नैतिकता का कम्बल ओढ़ कर
बोल जाते हैं ज्ञान की
होती नहीं कोई उम्र
और बघारने के लिए ज्ञान
स्मरण करते हैं शुकदेव को
यहाँ भी वे अपनी सज्जनता का
ठोक रहे होते हैं खूँटा
अपनी खत्म होती उम्र के गुमान में
प्रतिभा को नकारते-नकारते एक दिन
बिना प्रतिभा के मर जाते हैं 


पवन तिवारी
संवाद ७७१८०८०९७८ 


शुक्रवार, 31 जनवरी 2020

राम के नाम ...सवैया


राम के नाम ले तर ही गयी चाहे नीयत किसकी कैसी हो खोटी
हरदम राम  अगाध  रहे  हर  गागर  राम के  नाम  से छोटी
राम के नाम से  तुलसी तरयो जग में फहराय रही ताकी चोटी
राम  चरित  मानस में  ब्यापौ  गाय रहे  हैं जी कोटिन कोटी

राम के काज में लीन हुए, कहि राम  हुए हनुमान  जी जोगी
राम के नाम अहिल्या तरी शबरी प्रभु धाम की हो गयी भोगी
रामहि नाम प्रताप बड़ा  बस नाम  जपें  होई  जाएँ  निरोगी
कलयुग में बस राम अधार हैं नइया पार  जी  राम से होगी  

जिस दुनिया  के राम आधार हैं, उनको कहें कुछ स्वार्थी खोटा
राम  को धूर्त  नकार रहे,   जिनका  जग में परताप है मोटा
राम ही धर्म हैं राम ही कर्म हैं जग उनके सम छोटा सा लोटा
राम को देने चुनौती चले हैं, जो उनका चरित्तर छोटों में छोटा



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८

गुरुवार, 30 जनवरी 2020

वे हमको देहाती


वे हमको  देहाती  हमको  घास - फूस समझे हैं
सच तो ये है जो भी हैं हम हम अपने दम से हैं

तुम हमें जानों  हिन्दू  मुस्लिम  सिख  इसाई जानो
दुनिया तो बस इतना जाने हम भारत से भारत के हैं

सच व झूठ वफ़ा  गद्दारी  सबकी अपनी परिभाषा है
मिट्टी का अपमान करें जो मेरी नज़र में दुश्मन वे हैं

निज भाषा को हीन बताते पर भाषा का गान करें
उनसे पूछो वे  भारत में  और भारत के कब से हैं  

धर्म जाति और पन्थ वर्ण पर तुमको जो गाना गाओ
हम  इस  माटी के  बेटे हैं  और  इसी  की गाते हैं


पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८