यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

मंगलवार, 22 अक्टूबर 2019

अच्छी नज़र से सीखे


अच्छी नज़र से सीखे तो मुकाम कमाओगे
बुरी  नज़र  से तो  बस  जुल्म कमाओगे

भाव की  रेखाएँ गर  पहचान गये तुम
तो जिन्दगी में ढेर सा करार कमाओगे

दूसरों की सुन के भी  खुद पर यकीन गर
अपने ही रास्ते से फिर इतिहास कमाओगे

वादा न  टूटा  वक़्त के पाबन्द रहे ग़र
मतलब के जमाने में विश्वास कमाओगे

क़िरदार लुटा कर क्या कोई ख़ाक बना है
अच्छा खयाल पैसे से किरदार  कमाओगे

पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – पवनतिवारी@डाटामेल.भारत  




शनिवार, 19 अक्टूबर 2019

गाँव की व्यथा


खेती  करना  मरने  जैसा
गाँव नहीं अब  रहने जैसा
कहने को बहु लोग कहें हैं
नहीं रहा कुछ  करने जैसा

कुछ को  बातें  बुरी लगेंगी
कुछ को  थोड़ी सही लगेंगी
गाँव का वासी ही सच जाने
गाँव की  मेड़ें सड़ी  लगेंगी

जब देखो अकाल पड़ जाता
खेत आवारा पशु खा जाता
सरकारों  के   इंतज़ार  में
हरा खेत यूँ ही चर  जाता

सूखे से  घटती  आबादी
ओला से  भी हो  बर्बादी
बाढ़ में यदि अनुदान मिले भी
उसको भी खा जाये खादी

मजबूरी  का  नाम किसानी
कहने को भारत की निशानी
नये – नये तो नगर को भागे
गाँव में कैसे  कटे   जवानी

गाँव स्वर्ग थे नर्क  हो गये
अर्थ के कारण फर्क हो गये
खाली हाथ झुलाते कब तक
झूठे - मूठे  तर्क  हो  गये

बाग़ भी कटते-कटते कट गये
ताल भी पटते-पटते पट गये
अब  सूखे  का  रोना  रोते
जल के सारे स्रोत निपट गये

रिश्ते भी स्वारथ में बंट गये
अपने ही अपनों को चट गये
यहाँ  भी  पश्चिम आते  ही
भाई  भी भाई से  कट गये


मुश्किल   में   मजदूरी   है
जीना  भी   तो  जरुरी   है
इसीलिये  हैं  भाग रहे  सब
गाँव  से   बढ़ती   दूरी  है



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – पवनतिवारी@डाटामेल.भारत
   



बुधवार, 16 अक्टूबर 2019

तेरी एक नज़र


तेरी एक नज़र जो मिलती
जीने का मतलब  मिलता
फटे-फटे से इस जीवन को
तेरे  प्रेम  से  मैं सिलता  

वैसे भी मरना था मुझको
तू मिलती तो कम मरता
काँटे  भर  रखे  थे मैंने
थोड़ा  फूलों  को  भरता

प्रेम भी ज़हर मगर मीठा है
जिसे  मिले  वो  जाने  है
मुश्किल इसकी बस इतनी है
बहुत ही  कम  को माने है

वैसे तो मरना नहीं अच्छा
पर सच में सबको मरना है
ऐसे में तेरा प्यार मिले तो
मरने से फिर क्या डरना है

इतने  में  बस  इतना  समझा
कुछ भी हो यदि प्यार मैं करता
उस पर तेरा प्यार  जो मिलता
कुछ भी पर  कविता ना करता


पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – पवनतिवारी@डाटामेल.भारत   

रविवार, 13 अक्टूबर 2019

दिल बहलाने के ख़ातिर


दिल बहलाने के ख़ातिर मेरे गीत नहीं है
हाँ में हाँ ख़ातिर हम तुम्हरे गीत नहीं है
गीत   हमारे   मज़लूमों  के  साथी  हैं
गीत हमारे  दिनकर आज अतीत नहीं है

गीत हमारे लय के ही अनुसरण  नहीं हैं
प्रेमी मन का सहज-सरल अनुकरण नहीं हैं
गीत  मेरे  जन  संघर्षों   के  वाहक हैं
गीत मेरे बस कविता के आवरण नहीं हैं

गीत मेरे शब्दों के  केवल जाल नहीं हैं
अलंकार, श्रृंगार के केवल  लाल नहीं हैं
अपने  युग  के ये सच्चे  व्याख्याता हैं
काल के सच्चे वाद्य हैं केवल ताल नहीं हैं

ये  केशव  के  छंदों  जैसे  प्रीत नहीं हैं
केवल गीत हैं हार किसी की जीत नहीं हैं
प्रीति के आदि वैद्य हैं बस इतना समझो
दिल से गाते पर दावा  जगजीत  नहीं हैं 


पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – पवनतिवारी@डाटामेल.भारत

तुम्हें गर इश्क...


तुम्हें गर  इश्क मेरा चाहिए तो
हमें भी दिल तुम्हारा चाहिए तो

वो दिल लेकर खड़ी हो जाए रस्ते
मगर  कोई  दीवाना  चाहिए तो

बड़ी पागल उमर कच्ची कहूँ क्या
उसे दिल का ख़सारा  चाहिए तो

कि माझी की सदा सुननी पड़ेगी

जिन्दगी का किनारा चाहिए  तो 


वो कब से ताक में बैठी है दिल के
उसे  इक  ही  इशारा  चाहिए तो

पवन कैसी पवन चलने लगी अब
कहो हाँ – हाँ सहारा  चाहिए  तो



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – पवनतिवारी@डाटामेल.भारत 


शनिवार, 12 अक्टूबर 2019

वक्त आयेगा मगर


वक्त आयेगा मगर आप भी आते रहिये
कभी - कभी ही सही हाथ मिलाते रहिये

कौन जाने कि कौन किसके काम आ जाये
गरीब  जो  दे  चना प्यार से खाते रहिये

अमीरों  के  लिए  हर एक कला है हाज़िर
आप मजलूमों के दुःख दर्द को गाते रहिये

अच्छा लगने में कभी अच्छा वक्त लगता है
मज़ा आयेगा  मगर खुद को भी भाते रहिये

इश्क की गर्मी से वो भी तो निखर जायेंगे
प्यार  के  जैकेट को  यूं ही सिलाते रहिये

प्यार का मोजजा सचमुच जो देखना है अगर
दुश्मनों  को भी ज़रा  इश्क  चखाते  रहिये



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – पवनतिवारी@डाटामेल.भारत

उसे बुलाओ


उसे बुलाओ  पुनः सुनाओ
कहता कौन कि डर जायेंगे

रोम – रोम  ने पीड़ा भोगी
फिर भी बना नहीं ये योगी
राष्ट्र के आगे पीड़ा क्या है
हम  हैं देश  प्रेम के रोगी
हम तो भय से परे जा चुके
बहुत  हुआ तो मर  जायेंगे

हर  युग  में गद्दार हुए हैं
पीछे  से  भी  वार हुए हैं
फिर भी वीर हटे ना पीछे
लड़ते – लड़ते  पार हुए हैं
जिद की अपनी महिमा है
करते – करते कर जायेंगे

आपस  में  लड़ना छोड़ेंगे
घुट- घुट के मरना छोड़ेंगे
छोटा – बड़ा  व तेरा मेरा
कब  ये सब  करना छोड़ेंगे
रहे एक जो मिल करके हम
फ़तह  आसमां  कर जायेंगे

राष्ट्र रहा तो ही  हम  होंगे
कहीं  रहो   थोड़े  गम होंगे
निज पर यदि विश्वास रहा तो
कहीं भी  रहे  हम हम होंगे
बात उठी भारत हित की तो
उसके लिए  प्रति घर जायेंगे

गीत  देश  के हम गायेंगे
कुर्बानी  को  भी  आयेंगे
दुश्मन  की छाती पे नहीं
मस्तक पे तिरंगा फहरायेंगे
भारत  पर मरने वाले तो
बिन  गंगा के तर जायेंगे



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – पवनतिवारी@डाटामेल.भारत   

सोमवार, 30 सितंबर 2019

यूँ ही बनती है बात


यूँ ही बनती है बात यूँ ही बनाते रहिये
आयेगा दिल किसी का बस यूं ही गाते रहिये

किसी को तेल लगाने की जरूरत क्या है
फूल सरसो के मगर यूं ही खिलाते रहिये

दोस्ती ना सही दुश्मन भी न होंगे कोई
आते - जाते हुए तो हाथ मिलाते रहिये

प्यार से कम नहीं होनी भी दोस्ती उनसे
आते-जाते हुए घर उनके भी जाते रहिये

प्यार में मस्का लगाओ तो मजा आता है
मान जाती हैं पवन दिल से मनाते रहिये


पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – पवनतिवारी@डाटामेल.भारत  

शनिवार, 28 सितंबर 2019

यूँ ही बे-काम



यूँ ही बेकाम हाल लो तो ज़रा
आते–जाते कभी मिलो तो ज़रा

बात से बात  सुलझ जाती है
बात में बात कोई हो तो ज़रा

जड़ का तगमा उछाल सकते हो
बात मानों मेरी हिलो तो ज़रा

बिना मौसम भी मज़ा आता है 
सुनो बे-मौसम भी खिलो तो ज़रा

जीतने का मज़ा लेना है अगर
हारने का भी मज़ा लो तो ज़रा

मज़ा ख़याल का लेना है अगर
चलते-चलते पवन रुको तो ज़रा

पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – पवनतिवारी@डाटामेल.भारत     

मंगलवार, 24 सितंबर 2019

पवन तिवारी को ‘भारती साहित्य युवा सम्मान 2019’



मुंबई, साहित्यिक एवं सामाजिक क्षेत्र की ४५ वर्ष पुरानी संस्था भाषा प्रसार परिषद २१ सितम्बर २०१९ की शाम को बांद्रा [प.] के स्पाटिक सोसाइटी ऑफ इंडिया के सभागृह में युवा साहित्यकार, पत्रकार, कवि, चिंतक पवन तिवारी को एक भव्य समारोह में वर्ष 2019 का "भारती साहित्य युवा पुरस्कार" वरिष्ठ गीतकार,कवि पंडित किरण मिश्र के हाथों प्रदान किया गया। इस अवसर पर भव्य कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया. ज्ञात हो कि हिन्दी साहित्य की तमाम विधाओं में लिखने वाले पवन तिवारी  न केवल एक समर्थ लेखक हैं बल्कि एक कुशल वक्ता, मंच संचालक एवं चिंतक भी हैं. अपने पीला कहानी संग्रह ‘चवन्नी का मेला’ से चर्चित एवं ‘अठन्नी वाले बाबूजी’ के लिए महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी का जैनेन्द्र पुरकार प्राप्त करने वाले पवन तिवारी को साहित्य रत्न, साहित्य भूषण, अमृतादित्य साहित्य गौरव, साहित्य दिवाकर जैसे अनेकों पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं.उत्तर प्रदेश स्थित अम्बेडकर नगर जनपद के अलाउद्दीनपुर गाँव के एक मामूली किसान परिवार में जन्मे पवन तिवारी अपनी उपलब्धियों का श्रेय अपने माता-पिता के आशीष, मित्रों की शुभकामनाओं एवं अपनी जीवन संगिनी को देते हैं.