यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

रविवार, 4 अक्टूबर 2026

कुछ जो अच्छा मिले तो पढूँ मन लगा



कुछ जो अच्छा मिले तो पढूँ मन लगा

जोड़ ख़ुद को सकूँ उस कथा भाव से

एक दिन पुस्तकालय में संयोग से

मिल गयी एक पढ़ने लगा चाव से

 

उसकी प्रस्तावना मुझको रोचक लगी

प्रेम के प्रति लगी जगने संभावना

एक टेढ़ी नज़र थी बगल में मेरे

मेरे प्रति आ गयी उसमें दुर्भावना

 

देखने के बहाने लगा मांगने

मैंने दे दी समझ करके सद्भावना

पाके अवसर उठा ले गया वो उसे

रह गयी मेरे हिस्से में प्रस्तावना

 

मुझसे ग़लती न करना कभी दोस्तों

तुम दिखाना नहीं मुझसी सद्भावना

भूल कर अपनी पुस्तक दिखा दी अगर

पढ़ सकोगे फकत तुम भी प्रस्तावना

 

पवन तिवारी

०४/१०/२०२६


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