यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2022

कुछ भी हो जाये अब तो प्यार में गँवारा है

कुछ भी हो जाये  अब तो प्यार में गँवारा है

दिल से क्या चीज बड़ी वो ही हमने हारा है

 

वैसे दुनिया में  बहुत  प्यारे और अच्छे भी

खुद की जो बात चले खुद से कौन प्यारा है

 

तुम मिली भूल गये सारा जहाँ का किस्सा

किसके हिस्से में मिला चाँद या सितारा है

 

फर्क पड़ता ही नहीं तुमको कोई भी चाहे

और सच होता दिखे दिल पे चलता आरा है

 

उसकी आँखों में समंदर है बहुत हो कहते

यूँ    डूबो की  बहे  याद रखना खरा है

 

जिससे हारे थे सभी उसका भी किस्सा सुन लो

सुन के हँसना न ‘पवन’ प्यार का वो मारा है

 

पवन तिवारी

१३/०१/२०२१

 

कौन कहता है इसे

कौन कहता है इसे गाँव का रहने वाला

कहाँ मिले है ऐसा शहर में कहने वाला

 

गाँव की शहर हो हरदम ही जरूरत रहती

ज्यादती इसकी और कौन है सहने वाला

 

शहर को जल्दी है क़द अपना ऊँचा करने की

मगर अब गाँव भी जल्दी नहीं ढहने वाला

 

शहर की चिकनी-चुपड़ी वो भी समझने है लगा

भोली बातों  में  नहीं गाँव अब बहाने वाला

 

धोती कुर्ते में गँवारू लगें सो ठीक पवन

किसान क्या करेगा आदमी गहने वाला

 

पवन तिवारी

१४/०१/२०२१  

 

तुम मेरे पास आने वाले थे

तुम  मेरे  पास  आने वाले थे

मुझसे नज़रें मिलाने वाले थे

 

अब तो मिलना भी तुमने छोड़ दिया

कहाँ तुम दिल लगाने वाले थे

 

इरादे क्या  तुम्हीं  बदल से गए

तुम तो संग घर बसाने वाले थे

 

तुमने तो बात करना छोड़ दिया

तो क्या तुम  यूँ  सताने वाले थे

 

राख सपनों को कर दिया तुमने

तुम  मुझे  यूँ  जलाने  वाले  थे

 

शुरू होते ही साथ छोड़ दिया

साथ तुम यूँ  निभाने वाले थे

 

तुम्हारे बिन न जी सकूँगा मैं

यही  शायद  जताने वाले थे

 

बहुत पछताओगे लो जा रहा हूँ

तुम मुझे  क्या  बताने  वाले थे

 

 

पवन तिवारी

२२/०१/२०२१

 

रविवार, 13 फ़रवरी 2022

रंग भरे तेरे नैना

रंग  भरे  तेरे नैना, रस  से  भरे  तेरे  बैना

छवि तेरी नाच रही है, कटती है नहीं रैना

 

कैसी लगन लगी है, उर  में  अगन  लगी  है

मिलन की चाहत मुझको, जैसे ठगन लगी है

 

स्नेह  भरी  मुलाकातें, प्रेम  पगी  वो  बातें

उमड़-घुमड़ वो  आतीं, यादों  की  बारातें

 

प्रेमी   पागल   होते, प्रेम  में  आपा  खोते

प्रेम हुआ तो जाना, छुप-छुप के क्यों रोते

 

बिरह  बड़ा  दुखदाई, सब  लागें  हरजाई

मन झुंझलाकर बोले, हाय क्यों प्रीत लगाई

 

पवन तिवारी

०६/०१/२०२१

 

गाता हुआ मस्ती में

गाता हुआ  मस्ती  में  एक राहगीर है

ज़रा ध्यान से देखो वो देसी फकीर है

 

जो माँ-बहन का सामने सहता रहा अपमान

कैसे कहूँ कि उसका भी ज़िंदा ज़मीर है

 

पैसे के लिए कर लिया  सौदा  जमीर का

और आप कह रहे कि उसने मारा तीर है

 

सब कुछ तुम्हारे पास है पर खा नहीं सकते

इससे भी बढ़ कर ज़िन्दगी कोई पीर है

 

माना कि वो गरीब है धन के हिसाब से

खुशियों के मामले में वो बेहद अमीर है

 

पवन तिवारी

०७/०१/२०२१

 


क्या तुम्हें पता है !

क्या तुम्हें पता है !

लोग कहते हैं, मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ

किन्तु, मैं तुम्हें बस अपने पास चाहता हूँ

तुम्हें देखना चाहता हूँ भरपूर

तुम्हारी हर भंगिमा को पहचानना चाहता हूँ

सबसे पहचान बनाना चाहता हूँ

तुम्हें हँसते हुए देखना चाहता हूँ

तुम्हारी गंध को महसूस करना चाहता हूँ

तुम्हारी चाल को निहारना चाहता हूँ

ताकि तुम्हें दूर से ही कभी भी पहचान सकूँ

तुम्हारी आँखों से बतियाना चाहता हूँ 

ताकि अधरों के चुप रहने पर भी बतिया सकूँ तुमसे !

 

  सोचा हूँ, तुम आओगी तो प्यार करूँगा

तुम्हें पास से निहारना क्या प्यार करना नहीं है !

कुछ लोग कहते हैं, तुम नहीं आओगी ?

क्योंकि वे तुम्हें प्यार नहीं करती ?

किन्तु मैं जानता हूँ, तुम आओगी

मैं प्रतीक्षा करूँगा, तब तक

जब तक कि तुम नहीं आ जाती.

प्रेम में प्रतीक्षा ही सच्ची तपस्या है

जितनी कठोर तपस्या, उतना बड़ा वरदान !

तुमसे मिलना किसी वरदान से कम नहीं ,

और तुम्हें प्यार करना सबसे बड़ा वरदान

 

  लोग कुछ भी कहें पर तुम जरुर आना

तुम आओगी तो मुझे अपनी राह में

प्रतीक्षा करते हुए पाओगी

क्या तुम अपने आराधक से

नहीं मिलना चाहोगी ?

मेरा हृदय कहता है, तुम जरुर आओगी!

कभी न लौटने के लिए !

 

पवन तिवारी

०८/०१/२०२१

तो तुम कवि नहीं हो !


 तुम जो कवितायें लिखते हो

यदि उन कविताओं में तुम नहीं हो

तो, तुम कवि नहीं हो

जिन पीड़ाओं और सम्वेदनाओं को

कविता कह, शब्दों के पगहे में

बाँध रहे हो !

अगर वे तुम्हारी नहीं हुई हैं

तो, तुम कवि नहीं हो !

 जिस सौन्दर्य को तुम

शब्दों से बघार रहे हो

यदि तुमने उसके स्नेह को छुआ नहीं है

यदि तुमने उसे देखा नहीं है

मात्र कल्पना की है

तो, तुम कवि नहीं हो !

शब्दों और वाक्यों के मिलाप से

बने गुलदस्ते को यदि तुम

कविता समझते हो

तो, तुम कवि नहीं हो !

तुम मुझसे असहमत हो सकते हो

ख़ारिज कर सकते हो मेरे विचारों को

फिर भी मैं कहूँगा

तो तुम कवि नहीं हो !

 

पवन तिवारी

०९/०१/२०२१

गुरुवार, 10 फ़रवरी 2022

कि उसकी याद ने

कि उसकी याद ने सब ज़ख्म हैं ताज़े किये

प्यार में कैसे - कैसे  उसने  थे  वादे  किये

 

कि वो जिस प्यार का अक्सर ढिंढोरा पीटती

और उस प्यार  में  हमने  हैं  समझौते  किये  

 

हाथ  था  दोस्त के  हाथों  में साथ  मेरे थी

इसे अब क्या कहोगे  ऐसे  भी किस्से किये

 

आजकल प्यार एक जुमला होके रह गया है

कि इसके नाम पर कितने ही दिल सौदे किये

 

 प्यार का नाम सुनते ही फरेबों की है बू आती

कि  इसके  नाम   से  ही  जुल्म  वे सारे किये

 

फ़कत इतनी तमन्ना है कि बस ये घाव भर जाये

कि इक मासूम दिल के  कितने  ही  हिस्से किये

 

दर्द इतना दिया कि  जन्म  कवि का हो गया

कि कितनी बार कविता पाठ तक रोते किये

 

पवन तिवारी

०५/०१/२०२१

रफ्तार - ए - इश्क

 रफ्तार - ए - इश्क लगातार नहीं होते हैं

ये भी सच प्यार कि अख़बार नहीं होते हैं

 

आँख का साफ़ दिखा साफ़ झूठ हो सकता

पगड़ी  वाले  सभी  सरदार नहीं  होते हैं

 

वफा के इश्क में ख़तरे बहुत ही कम होते

धोखे मिलते जो  ख़बरदार  नहीं होते हैं

 

वो मुझे छोड़ कर मेरे ही जैसा फिर ढूंढे

एक ही  आदमी  कई  बार नहीं होते हैं

 

लुटा के इज्जत भी  क़दमों में पड़े रहते हैं

कुछ वफादार  जो   ख़ुद्दार  नहीं होते हैं

 

दास तुलसी व कालीदास सबको याद अभी

प्यार  के  झटके भी  बेकार  नहीं  होते  हैं

 

पवन अपनों में तो थोड़ा झुकना पड़ता है

कौन  से  रिश्ते  में  तकरार  नहीं  होते हैं  

 

पवन तिवारी  

 

०६/०१/२०२१

 

बुधवार, 9 फ़रवरी 2022

बड़ा नसीब है जो सबकी दुआ पाता है

बड़ा नसीब है जो सबकी  दुआ  पाता है

दुआ पाने का हुनर सबको कहाँ आता है

 

मुझसे बोला नहीं जाता है झूठ वैसे भी

बोलता भी हूँ तो पकड़ में आ जाता है

 

वो जो होती है तो ध्यान भटकता ही है

बिगड़ ही जाता है फिर कहाँ स्वर में गाता है

 

ये बड़ी बात नहीं  चाहते उसको कितने

बात तो ये   है  कि  कौन  उसे भाता है  

 

किसी के दिल में झाँकना व उतर जाना भी

ये हौसला  तो  दीवानों  को फ़कत लाता है

 

किसी के दिल को चुरा करके तरसाना भी

पवन यूँ कौन  हसीनों  पे  जुल्म  ढाता है

 

पवन तिवारी

०४/०१/२०२०