भूल
नहीं पाता हूँ
लौट
लौट आता हूँ
दूर
- दूर जा करके
गाँव
तुझे गाता हूँ
तू
भी नहीं वैसा है
वो
न तेरे जैसा है
नहीं
एक सा कोई
प्यार
एक जैसा है
गाँव
तू न गाँव रहा
मिटटी
में न पाँव रहा
तू
भी हुआ शातिर ना
सच्चों
का ठाँव रहा
वहां
थोड़ा पैसा है
सब
जानें कैसा है
तुझसे
ठीक है अब तो
शहर
शहर जैसा है
फिर
भी कुछ बचा तुझमें
और
कुछ बचा मुझमें
जोड़
हमें देता है
तू
मुझमें मैं तुझमें
मिट्टी
का नाता है
तू
मुझमें गाता है
भूल
जाऊं दिन में जो
सपने
में आता है
पवन
तिवारी
५/०२/२०२६