यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

गुरुवार, 23 अप्रैल 2020

तुम मेरे प्रेम की प्रथम भूमिका


तुम मेरे प्रेम की प्रथम  भूमिका
नैन  कहें   तू   मेरी  सारिका
मिली तो  पूरी  पुस्तक  लेकर
लगा  तुम  ही  मेरी  नायिका

सोचा कथ्य तो  बिखर गया है
शिल्प मिला तो निखर गया है
ऐसे  में  फिर  प्रेम  हँसा तो
कितनों को  ही आखर गया है

प्रेम मिला तो तन मन खिल गया
चाह से भी उत्तम  वर मिल गया
ऐसे  में  कुछ   अपने  जले  यूँ
जैसे  उनके गाल से  तिल  गया

सारे दुखों का  जैसे  हल  मिला
चाहत वाला आज ही  कल मिला
पुण्य के  भाव  जगे   हैं हिय में
जैसे  पावन   गंगा  जल  मिला

प्रेम  मिले  सो  हैं   बड़भागी
अमर हुए हैं  प्रेम  के   बागी
जिसको प्रेम मिला  जीवन  में
उसकी   सोयी  किस्मत  जागी


पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – poetpawan50@gmail.com  

बुधवार, 22 अप्रैल 2020

करिखा से कई

करिखा से कई  द्या     उजियारा
मईया   अइली  तोहरे      दुआरा

अइसन वइसन कइसन  होई  जायें
उसरो ज्ञान से हरियर  होई   जाये
अनपढ़   आन्हर    और   गूंगन
काली  सूर   कबीर   होई   जाये

किरपा  होय  तअ   मूरख   पंडित
क्रोध  मोंह मद  कई  द्या खण्डित
मीठ – मीठ बीन बजावै वाली मइया
अदनो  भी  होई    जाये    मंडित

तोहरे  असीस  से  मन होये उज्जर
होय  उछिन्न  बुरा  सब    चक्कर
सुरसती    मइया    तुहैं   गोहराई
खट्ट  है  मनवा  कइ  द्या  शक्कर



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८

अणु डाक – poetpawan50@gmail.com  

जहाँ जरूरी मेड़ बांधते


जहाँ  जरूरी    मेड़   बांधते
ऐसे  ही  वे   हमें    साधते
ऊसर  को  गोबर   से  पाटें
बिगड़े को  इस  तरह  नाधते

तालाबों   को   गहरा  करते
आम के बाग़ में  पहरा करते
काट – काट  के  आलू  बोते
फसल के साथ में लहरा करते

पैरों  से  मिट्टी  को  खमसते
इसी तरह  से  उसे   समझते
गाय  के  पुट्ठे   को  सहलाकर
उसके  मन  के  भाव  परखते

खेत की माटी  हाथ  से मलते
मेड़  पे  नंगे  पाँव  ही  चलते
धान  निहारें खेत  में  घुस के
बीजों  सा   खेती   में  ढलते

बारिश  हो  तो  खेत    भागते
करें   सिंचाई    रात   जागते
नील गाय  जब  खेत   चरे तो
सुतली   वाला   बम्म   दागते

घुटने   तक   धोती   लिपटाए
खेत  में  सांड़   तो  दौड़े आये
मटर   रखाते  शीत   लहर में
मन  उलझे    तम्माखू   खाये

ठंड  लगे  तो   आग   जलाते
उसी  में  भून  के  आलू खाते
कनपट्टी  पर  बाँध    अंगोछा
मन  आये  तो  टेर  के  गाते

 हमरे  बाबू  जी  किसान हैं
हमरे  ही  नहीं देश की जान हैं
कहने को कोई कुछ  भी कह दे
गाँव  सहर  क्या सबके प्रान हैं



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – poetpawan50@gmail.com  



सोमवार, 20 अप्रैल 2020

मेरी नज़रों से


प्यार में इस क़दर इतना जो बिगड़ जाओगे
मेरी नज़रों से यूँ झटके  में  उतर  जाओगे

मेरा  सिन्दूर  लगा  गैर  के  घर  जाओगे
इतने  नीचे  ऐसे  यहाँ  तक गिर  जाओगे

हवस मिटते ही सनम उसने तुम्हें छोड़ दिया
मगर अब हवस ही  मिलेगी  जिधर जाओगे

प्यार मिलता है जन्मों  की दुआयें जो लगें
उसकों ठुकराओगे तो  तड़प के मर जाओगे

जिसने पनाह दी  चाहा उसे ही कत्ल  किया
और फिर सोचते  अल्लाह  के घर  जाओगे

प्रेम की आह दुःख की आह से भी भारी पवन
तमाम   उम्र   भटकते   ही  रह   जाओगे
 



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – poetpawan50@gmail.com

मेरे पास सुख के कई साधन हैं.


मेरे पास सुख के कई साधन हैं.
किन्तु वही दुःख के भी साधन हैं.
जब मैं दुःख को यूँ ही धकियाकर
बढ़ जाता हूँ आगे ;
किसी मित्र से बातें करने !
मुझे बातें करना सुख देता है.
हाँ, यह सुख तब और बढ़ जाता है,
जब सामने वाला
सुनने का भी सुख ले रहा हो !
मुझे प्रेम करने जैसा सुख मिलता है !
जब मैं किसी को सुनते हुए
ये महसूस करता हूँ कि बस !
इसका बोलना कभी खत्म न हो ;
हाँ, पर कई बार
जब अपनी इच्छा के विरुद्ध
बोलना या सुनना पड़ता है,
तब मुझे कहीं दूर
भाग जाने का मन करता है.
जहां मेरे सिवा सिर्फ प्रकृति हो !
यदि ऐसा नहीं होता तो,
नहीं कर सकता अपनी पीड़ा की व्याख्या !
हाँ, इसे पढ़कर जरुर आप को अपने
कई ऐसे सुख और दुःख याद आये होंगे !



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – poetpawan50@gmail.com

रविवार, 19 अप्रैल 2020

क्रोध का यदि करो शमन


क्रोध का  यदि   करो  शमन
लालच का कर  सको   दमन
हो जाएगा सहज  ये  जीवन
अहं का यदि कर सको हवन

स्व को  छलते   होकर  क्रुद्ध
सर्वनाश  का  ध्वज   है युद्ध
युद्ध महामारी  का    द्योतक
शान्ति  मार्ग  तो  केवल बुद्ध

निज  को  अगर  बचाना  है
स्व  से  स्व  तक  जाना है
निज के अंदर ध्यान से झाँको
सत  पथ  पर  यदि आना है

जीवन   एक     परीक्षा   है
सुन्दर  दिखती    इच्छा   है
यदि होना    उत्तीर्ण तुम्हें तो
गुरु   से   लेनी     दीक्षा  है


पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – poetpawan50@gmail.com

पीड़ा में सुख देती कविता


पीड़ा में  सुख  देती  कविता
अन्धकार  में  जैसे  सविता
समय के  परे  ले  जाती ये
जान ही  ले आगे की भविता

दर्द मेरा आक्रोश  में  सुलझा
हुआ तभी कविता का जलसा
जब – जब  भूखे पेट रहा मैं
तब छलका लेखन का कलसा

संघर्षों  में  ही   लिखता   हूँ
उसमें  मैं  खुद  दिखता   हूँ
मेरे दुःख का  औषधि  लेखन
थोड़ा  खुरदुरा  सा  दिखता हूँ

कविता जैसे  मृत्यु  को डसना
काल के गाल पे खुद को रचना
सबसे कठिन  शब्द से मिलना
जैसे   सुविधाओं   से  बचना

इसका  नाम   क्यों  अक्षर है
होता   नहीं    कभी   क्षर है
वेदों  ने   भी  गायी  महिमा
इसीलिये       प्रणवाक्षर   है



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – poetpawan50@gmail.com  
   

शनिवार, 18 अप्रैल 2020

भूख की निजता


वर्षों पहले मैंने लिखी थी एक कविता-
‘भूख ने मर कर बदला लिया’
उसने अपनी निजता की रक्षा के लिए
त्याग दिए थे प्राण !
किन्तु, इस बार एक भूख नहीं है,
हजारों, लाखों, शायद करोंड़ों है
भूख से बड़ी निजता शायद कुछ नहीं,
करनी होगी उसकी निजता की रक्षा !
यदि हुई उसकी निजता भंग
और खुल गया उसका भेद,
तो इससे बड़ा अनर्थ कुछ नहीं होगा.
क्योंकि भूख काल से भी
नहीं होती भयभीत !
जब वह बाहर आएगी,
हजारों,लाखों शायद करोड़ों की संख्या में
तो मौत भी माँगेगी जीवन की भीख
भूख से बढ़कर कोई महामारी नहीं
क्योंकि भूख स्वयं के सिवा
किसी को भी नहीं पहचानती.



पवन तिवारी
संवाद – ७७१८०८०९७८
अणु डाक – poetpawan50@gmail.com