यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

सोमवार, 10 अप्रैल 2017

तुमसे हुआ जो प्यार तुमसे होके रह गया




तुमसे हुआ जो प्यार तुमसे होके रह गया  
किसी काम का रहा ना मैं काम से गया
सुबह से गया मैं शाम से गया
ऐसे लगा के जैसे मैं  हर काम से गया


मदमस्त नींदें गई,चायवाला स्वाद गया
रात सूनी–सूनी गई,दिन बेकरार गया
पल भर की खुशियाँ मिली
दिल में से जान गया


ख्वाब तुमसे मिलने का मैं देखता रहा
तुम मिलोगी इक दिन राह तकता रहा
जब से देखा तुमको तुम्हारा ही होक रह गया
प्यार में तुम्हारे आवारा ही होक रह गया


फिर ना कोई तब से नज़रों में मेरे समाया
प्यार तो रहा मगर इकरार रह गया
दिल हुआ बेकरार बेकरार होके रह गया
तुम आओगी आने का इंतज़ार होके रह गया

poetpawan50@gmail.com
सम्पर्क - 7718080978  


कृपा करो हनुमान













हर दुखिया के हो तुम अपने  

करते कष्ट निदान
अंजनि नन्दन दुःख के भंजन
सबसे प्रिय तुम्हें राम ..... कृपा करो हनुमान

अजर अमर हे मारुति नन्दन
करते हैं सब तुम्हरे वंदन
सब मंगल कर देने वाले
दुर्गम काज बनाने वाले ..... कृपा करो हनुमान

प्रभु जी खड़ा मैं तुम्हरे द्वारे
बिगड़े काज बनाओ सारे
हम हैं प्रभु जी तुम्हरे सहारे
कृपा करो हे ईष्ट हमारे ..... कृपा करो हनुमान

दीनदयाल दया के नायक
प्रेम करें तुमको रघुनायक
सुर नर मुनि सबके हित नायक
कृपा करो हम हों कुछ लायक ..... कृपा करो हनुमान


सम्पर्क - 7718080978

हे जग जननी , हे जगधात्री.

















हे जग जननी , हे जगधात्री.
सुरसरि उर कर दो ,सच,साहस,बल दो.


वीणावादिनी,वाग्देवी शुभ्र सुमति मति दो.
जग कल्याण लिखूं हे माता, तुम ऐसा वर दो.


तुलसी,सूर,निराला,दिनकर,सा तन मन कर दो.
विमला,वागेश्वरी हे माता, प्रज्ञा का वर दो.


ब्राह्मी,वाचा,वीणाधारिणी,सरस्वती,गिरी,भारती.
नाम अनंत तुम्हारे माता,राष्ट्र प्रेम भर दो.


तुम्ही विधात्री,तुम्ही हो भाषा,तुम्ही इला,वागीश.
स्नेह,त्याग और सत्यशील का ज्योंतिर्मय वर दो.


गीता,वेद,पुराण तुम्ही हो,तमस,कोप हर लो .
राष्ट्र चरण में सब करू अर्पण,तुम ऐसा वर दो.


हे जग जननी , हे जगधात्री

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गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

कौन लौटाएगा जवानियाँ मेरी
































कहा जब से कि नहीं हैं मेरी 
रूठी- रूठी हैं तन्हाइयां मेरी 

वो मुझे  भूलें ये  मुमकिन है नहीं 
बीती जिन बाँहों में जवानियाँ मेरी

इशारे से उन्हें अब कौन चुप करायेगा
होठों  पर होंगी न ये उंगलियाँ  मेरी

मुझको क्या देगी जो लुटेरन हो
पी गयी सारी  रानायियाँ मेरी

अब भी बाकी है बहुत कुछ मेरा
मुझको लौटा दें कहानियाँ मेरी

धूप में अब जब वो निकलेंगी
याद आयेंगी  परछाइयाँ मेरी

जब भी जायेंगी अपने कमरे में
बहुत  खलेंगी  चुप्पियाँ  मेरी

रात जायेंगी जब वो बिस्तर पे
याद   आयेंगी  खूबियाँ  मेरी


सम्पर्क - 7718080978 

बुधवार, 5 अप्रैल 2017

मैं तुम्हें चाहती हूँ बेपनाह




























मैं तुम्हें चाहती हूँ बेपनाह
और चाहती हूँ तुम भी चाहो
मैं तुम्हें ऐसे पाना चाहती हूँ
जैसे- जब मैं जाड़े में ठण्ड से
कांपती जाड़े वाली लडकी हो जाऊं
तब तुम जाड़े वाली गुनगुनी
धूप बनाकर आना.
 जब मैं गर्मियों में पसीने से तर-बतर हो जाऊं
तब तुम शीतल पवन बन मेरे बदन में लिपटना
मेरी गंध को महसूस करना
जब शीत लहर में मेरी उँगलियाँ कांप रही हों
तब तुम अलाव की आँच बन मेरी उँगलियों को चूमना
 मैं तुम्हें पाना ही नहीं,अपने साथ
पूरा–पूरा महसूस करना चाहती हूँ
जब मैं जाड़े की रात में सोने जाऊं
तब तुम रजाई बन मेरे पूरे ठण्डे बदन को
धीरे-धीरे प्यार से गर्म करना और फिर
एक-दूसरे की गर्माहट से भरी
प्यारी आगोश में खोकर सो जाएँ
मैं तुम्हें अपने रोम-रोम में समाहित करना चाहती हूँ
अंग-अंग में तुम्हें और तुम्हारी गंध को भी पाना चाहती हूँ
सावन में जब भी खुले आसमान में निकलूँ
तुम बारिश बनकर मुझसे मिलने आओ
मेरा रोम-रोम अपनी महकती बूंदों से पुलकित कर दो
तुम मुझे ,मैं तुम्हें पा जाऊं रेशा-रेशा पूरा का पूरा
मैं चाहती हूँ पूर्णता में पाना एक ऐसी निशानी
जो सदा “तुम मेरे हो” का एहसास दिलाये
जब मैं मंडप में बैठूँ मेरी माँग संवारी जाए तो
तुम उसमें सिन्दूर बनकर बस जाओ ताकि मैं
पूरी-की-पूरी तुम्हारे नाम में घुल जाऊं
मुझे सिर्फ मेरा नाम नहीं चाहिए क्योंकि
मैं तुम्हें चाहती हूँ तुममे ही
अपना भविष्य देखती हूँ
सब कुछ पाने के लिए
सब कुछ खोना पड़ता है
मैं तुम्हें पूरा पाना चाहती हूँ
खुद को पूरा खोकर और फिर
हमारे संयुक्त अस्तित्व की
निशानी दुनिया में आयेगी
जो न मेरी न आप की बल्कि हमारी होगी
और फिर मैं मैं नहीं आप आप नहीं बल्कि
हम होंगे और तब हम पा सकेंगे
पूरा-पूरा एक दूसरे को

poetpawan50@gmail.com
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मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

सुना है तुम कभी जाना नहीं चाहते

















सुना है तुम कभी मरना नहीं चाहते
अच्छा सोच लेते हो, पर दुर्लभ सोचते हो
हमेशा ज़िंदा रहना बहुत कठिन है, पर असम्भव भी नहीं
पर हाँ जमाने की रवायत के अनुसार
एक बार तो मरना पड़ेगा
पर मर कर भी तुम ज़िंदा रह सकते हो
पर मेरी कुछ शर्तें हैं जैसे ...कि
फिलहाल जब तक तुम
मरने की रवायत तक नहीं पहुँचते
तब तक तुम्हें उदास होंठों पर मुस्कान सींचनी होगी
बिलखते दिलों में धड़कती उमंग भरनी होगी
मजलूमों को अपनाकर अपनापन देना होगा
उजड़ते घरौंदों को घरौदों के रूप में ही बचाना होगा
दर्द से लरजते आँसुओं को पोछना होगा
उन्हीं आँखों में खुशियों के आँसू छलकाना होगा
जरूरतमंद के लिए तुम्हें दरवाज़ा खुला छोड़ना होगा
बोलो तुम तैयार हो मेरी इन शर्तों के लिए ...अगर हाँ तो
वादा नहीं करूँगा,बल्कि तुम्हारे सदा ज़िंदा रहने का
यमराज के सामने भी तुम्हारा जमानतदार बनूँगा
जब तुम मौत की रवायत वाली रस्म पूरी करके लौटोगे
देखना अचरज और खुसी से भर जाओगे
अब तुम्हारे न जाने कितने घर होंगे
लोग तुम्हारे लिए अपने दिल को ही घर बना देंगे
न जाने कितने दिलों में तुम्हार घर होगा
लोगों की जुबान पर तुम ज़िंदा रहोगे
फक्र और ईज्जत के साथ
नेकियाँ कभी नहीं मरती
वो दिलों में ज़िंदा रहती हैं
तुम सदा ज़िंदा रहोगे लोगों के दिलों में

वो भी पूरे सम्मान से ..... तो बोलो है मंज़ूर......!

इसका दूसरा संस्करण

सुना है तुम कभी जाना नहीं चाहते
अच्छा सोच लेते हो, पर दुर्लभ सोचते हो
हमेशा रहना बहुत कठिन है,
पर हाँ ज्यादातर लोग लौट नहीं पाते
 पर लौटना असम्भव भी नहीं
पर हाँ उसकी रवायत के अनुसार
एक बार तो जाना ही पड़ेगा
पर जाकर भी तुम ज़िंदा रह सकते हो
पर मेरी कुछ शर्तें हैं जैसे ...कि
फिलहाल जब तक तुम
जाने की रवायत तक नहीं पहुँचते
तब तक तुम्हें उदास होंठों पर मुस्कान सींचनी होगी
बिलखते दिलों में धड़कती उमंग भरनी होगी
मजलूमों को अपनाकर अपनापन देना होगा
उजड़ते घरौंदों को घरौदों के रूप में ही बचाना होगा
दर्द से लरजते आँसुओं को पोछना होगा
उन्हीं आँखों में खुशियों के आँसू छलकाना होगा
जरूरतमंद के लिए तुम्हें दरवाज़ा खुला छोड़ना होगा
बोलो तुम तैयार हो मेरी इन शर्तों के लिए ...अगर हाँ तो
वादा नहीं करूँगा,बल्कि तुम्हारे सदा ज़िंदा रहने का
यमराज के सामने भी तुम्हारा जमानतदार बनूँगा
जब तुम जाने की रवायत वाली रस्म पूरी करके लौटोगे
देखना अचरज और खुसी से भर जाओगे
अब तुम्हारे न जाने कितने घर होंगे
लोग तुम्हारे लिए अपने दिल को ही घर बना देंगे
न जाने कितने दिलों में तुम्हार घर होगा
लोगों की जुबान पर भी तुम ज़िंदा रहोगे
फक्र और ईज्जत के साथ
नेकियाँ कभी नहीं बेकार नहीं जाती
वो दिलों में ज़िंदा रहती हैं
तुम सदा ज़िंदा रहोगे लोगों के दिलों में
वो भी पूरे सम्मान से ..... तो बोलो है मंज़ूर......!
सम्पर्क- 7718080978


रविवार, 2 अप्रैल 2017

आँखों में शराब होठों पे गुलाब






































आँखों में शराब होठों पे गुलाब
जाने–जाना तूं है सबसे लाजवाब

तुझसे मिल के“जाना”जाना जिन्दगी को
प्यार में ही जिन्दगी का है सारा शबाब

तेरी जवानी अभिरूप है
तेरा प्यार तो खिलता पुष्प है

जाने जाना तूं मिली तो जिन्दगी खिली
जिन्दगी की सबसे खूबसूरत खुसी मिली 

 गीत का दूसरा संस्करण


आँखों में शराब होठों पे गुलाब
जाने–जाना तूं है सबसे लाजवाब

तुझसे मिल के“जाना”जाना जिन्दगी को
प्यार में ही जिन्दगी का है सारा शबाब

तेरी जवानी ज़िंदा कबाब
तेरा प्यार तो है पूरा शबाब

जाने जाना तूँ मिली तो जिन्दगी खिली
भगवान् करें इस प्यार को ना कोई करे खराब 

poetpawan50@gmail.com

सम्पर्क -7718080978 


उसको चढ़ा नशा है



























उसको चढ़ा नशा है जी प्यार की तरह
पानी   परोसती है तो  शराब  की तरह 

सरकार की तरह सुनता नहीं ये प्यार
करता है फ़क़त अपनी थानेदार की तरह

उसकी   अदा का भी  कोई  जवाब नहीं है

इनकार भी करती है तो इकरार की तरह



पत्नी कि प्रेमिका,कि दोस्त है कि क्या 

वो डांटती भी है तो माँ - बाप की तरह


मिलता हूँ जब भी उससे,बस खो सा जाता हूँ

मुझको   दिखाई   देती   है वो ख्व़ाब की  तरह


अपने दुखों की हर ख़बर कुछ यूँ छुपाती है

लगती  है शक्ल   उसकी   अखबार  की  तरह


अपनों  ने उसके  साथ में व्यवहार यूँ किया

हर रिश्ते को अब समझे वो बाज़ार की तरह


कुछ इस अदा से कहती है मैं मान लेता हूँ


वो झूठ  भी  कहती है सत्यवान  की  तरह



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