यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी
रविवार, 18 दिसंबर 2016
पवन तिवारी वालपेपर
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
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12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
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शुक्रवार, 16 दिसंबर 2016
जिन्दादिली
गज़ल
खाली बैठे से है अच्छा कि कुछ किया जाए.
किसी बीमार को कुछ देर हंसाया जाए.
उम्र लम्बी है जिन्दगी छोटी.
लम्हा-लम्हा किसी दीवाने सा जिया जाए.
रोने के वक्त बहुत आये,बहुत आयेंगे.
चलो फिलहाल छोटी खुशियों से मिला जाए.
कल क्या होगा,जो होगा,होगा ही.
सोंचकर आज को बर्बाद क्यों किया जाए.
चलो छोडो न सोचो, फिजूल की बातों को.
कौन सा दिन हो आख़िरी,जी भर जिया जाए.
poetpawan50@gmail.com
सम्पर्क-7718080978
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गुरुवार, 15 दिसंबर 2016
बाल कविता- मैं पवन हूँ
''मैं पवन हूँ''
लाख कोशिश कर
चुके,
पर मैं नज़र
नहि आ सका.
कौन है? कैसा
है ये?
इसके तन का
स्वरुप क्या है?
एहसास करके
ही सभी,
संतोष करते
हैं सभी.
गर्मियों की
चिलचिली धूप में,
जब छाँव में राही रुका
एक झोंका चल
गया,
पत्ते-पत्ते
हिल गये
मस्तक के
सारे पसीने,
झट से गायब
हो गये
दूसरा कोई
नहीं वह
‘मैं पवन हूँ’
जब ऋतुराज
बसंत है आता
वृक्षों में
नूतन पात है आता
हरे-हरे
पत्ते जब,
हँस-हँस कर
लहराते हैं
रंग-बिरंगे
कुसुम,
जब सुगंध
बरसाते हैं.
खुशबू
बिखरे,पौधे झूमें
फूली सरसों
लहरा उठे
उस लहर में दूसरा
कोई नहीं वह
‘मैं पवन हूँ’
पवन तिवारी ,सम्पर्क -7718080978 / 9920758836
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बाल कविता.....बरखा बादल
बाल कविता .....
‘बरखा बादल’
काले बादल, नीले
बादल,उड़ते रहते हैं ये बादल.
न्यारे
बादल,प्यारे बादल, पानी भर-भर लाते बादल.
मेघा आते,बरखा
लाते, तपती अवनि शीतल कर जाते.
नाले,तड़ाग सब भर
जाते,दादुर मीठे स्वर में गाते .
मोर नाचते मस्त
हो बन में,कृषक चलाते हल खेत में.
चारो तरफ
हरियाली छाई,बरखा आई-बरखा आई.
रिमझिम–रिमझिम
बरखा आती,तन-मन को गीला कर जाती.
समय-समय पर आते
बादल,बरखा कर चले जाते बादल.
कभी-कभी तपती
धूप में,सूरज को ढक जाते बादल.
अल्प समय के लिए
भले पर,छाँव हमें दे जाते बादल.
मस्त पवन के साथ
ए उड़ते,सदा नील अम्बर में रहते.
काले-बादल-नीले
बादल, गरजने–बरसने वाले बादल.
पवन तिवारी
सम्पर्क -7718080978/9920758836
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
रविवार, 11 दिसंबर 2016
मेहनत से तुम काम करो
ग़ज़ल
मेहनत से तुम काम करो,वरना हासिल कुछ ना होगा .
बहुतेरे बातें करते हैं,बस बातों से क्या होगा .
ज़िंदा होके मरने की,बातें करना कायरता है.
कुछ करके जो मरोगे तो,दुनिया में तुम्हारा नाम होगा.
गैर भरोसे बैठे रहने, से कुछ हासिल ना होगा.
पतवार जो खुदी चलयेगा,उसका बेड़ा पार होगा.
एक अकेले के करने से, फ़तह नहीं मिलने वाली.
सब मिलकर के जतन करो तो,सागर पर भी पुल होगा.
शुरू-शुरू में प्यार मोहब्बत,सबको अच्छा लगता है .
जीवन भर जो साथ निभाये,सच्चा साथी वो होगा.
छोटी-छोटी बातों पर,लड़कर हासिल क्या कर लोगे.
मिल-जुलकर जो रहोगे तो, जीवन का सफर मधुर होगा.
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
तेरे हिस्से की धूप
नज़्म
तेरे हिस्से की धूप,तुझको देना चाहता हूँ .
कुछ देर छाँव में फिर से जाना चाहता हूँ
तेरी उदासियों को मैं उधार लेना चाहता हूँ
बदले में तुझको मैं मुस्कान देना चाहता हूँ
बहुत खुशियाँ मिली हैं,उन्हें मैं, गुनगुनाना चाहता हूँ
बाँटकर दोस्तों में और खुश होना चाहता हूँ
तूं मेरा दोस्त रहा, है,रहेगा ,यही बस चाहता हूँ
अपनी इस दोस्ती को बस रिझाना चाहता हूँ
तेरा,दुःख,मेरा गम,''हमारा''होना चाहता हूँ
दूर हों कितने भी हम,पर दिल में साथ रहना चाहता हूँ .
पवन तिवारी
सम्पर्क-7718080978
तेरे हिस्से की धूप,तुझको देना चाहता हूँ .
कुछ देर छाँव में फिर से जाना चाहता हूँ
तेरी उदासियों को मैं उधार लेना चाहता हूँ
बदले में तुझको मैं मुस्कान देना चाहता हूँ
बहुत खुशियाँ मिली हैं,उन्हें मैं, गुनगुनाना चाहता हूँ
बाँटकर दोस्तों में और खुश होना चाहता हूँ
तूं मेरा दोस्त रहा, है,रहेगा ,यही बस चाहता हूँ
अपनी इस दोस्ती को बस रिझाना चाहता हूँ
तेरा,दुःख,मेरा गम,''हमारा''होना चाहता हूँ
दूर हों कितने भी हम,पर दिल में साथ रहना चाहता हूँ .
पवन तिवारी
सम्पर्क-7718080978
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
शनिवार, 10 दिसंबर 2016
बहादुरी व अन्य लघुकथाएं
रहम
एक गरीब आदमी को अनाज चोरी के आरोप में एक सेठ ने गिरफ्तार करवा दिया. गरीब को अदालत में पेश किया गया. जिरह के बाद जज ने दस हजार का जुर्माना और छह माह की सजा सुनाई. गरीब
आदमी ने गिड़गिड़ाते हुए हाथ जोड़कर विनती की.जज साहब गरीब
आदमी हूं.10 हजार कहां से
लाऊंगा.कुछ रहम कीजिए.जज ने
मेज पर रखा चश्मा उठाकर नाक पर टिकाते हुए सहमति में सिर
हिलाया.गरीब आदमी ने हाथ
जोड़कर सिर झुकाया,कृतज्ञता जताई. जज ने फैसला बदलते हुए कहा-
मुजरिम की माली हालत
को देखते हुए जुर्माने की रकम 10000 से घटाकर 5000 की जाती है. इतना
सुनते ही गरीब आदमी के चेहरे पर एक राहत की रंगत दौड़ी ही थी कि जज ने आगे कहा- और 6 माह
की सजा 1 वर्ष में तब्दील की जाती है. इतना सुनते
ही गरीब आदमी गश खाकर कटघरे में ही गिर
गया.
इज्जत
इज्जत
एक बार एक सेठ के घर में खिड़की के रास्ते कुछ चोर घुस आए.तिजोरी की चाबी पाने के लिए इधर-
उधर खोजने लगे.इस कोशिश में घर का ढेर सारा सामान तितर-बितर हो गया.इस बीच सेठ की नींद टूट
गयी,पर वह
डर के मारे चुप रहा.तभी चोर सेठ की बेटी के कमरे की तरफ बढ़े.चोरों को बेटी के
कमरे
की तरफ बढ़ते देख,सेठ अचानक उठकर बैठ गया और चीखते हुए बोला- मेरी बेटियों को हाथ मत
लगाना.चाहे तो मेरी
इज्जत ले लो.
आंखों वाला अंधा
आंखों वाला अंधा
एक बार बाजार में दंगा हुआ.एक व्यापारी के दुकान में कुछ दंगाई
घुसे और गल्ले पर बैठे उसके बेटे
को पीटने लगे.व्यापारी
चिल्लाया- अरे यह क्या कर रहे हो? यह क्या कर रहे हो? एक दंगाई बोला दिखता नहीं,आंखें होकर भी सूरदास बन
रहा है. तभी दूसरा दंगाई गल्ला खोलकर सारे रुपए लेने लगा.व्यापारी फिर चिल्लाया-
अरे क्या कर रहे हो- दंगाई बोला- तेरा गल्ला लूट रहा हूं. आंखों वाले अंधे सेठ.
मुझे मालूम है...
अलगू के पड़ोसी का लड़का साइकिल चलाते हुए गिर पड़ा. उसके घुटने में गहरी चोट लग गई । लड़के के
घर कई लोग देखने पहुंचे.
पहुंचते ही अलगू ने कहा- ‘मुझे मालूम था यह
गिरेगा’ चोट तो लगनी ही थी.
यह चला ही ऐसे रहा था. घरवालों को बुरा लगा, पर किसी
ने कुछ कहा नहीं. कुछ दिनों बाद एक दूसरे
पड़ोसी का बेटा परीक्षा में फेल हो गया.
वहां भी अलगू पहुंचे और पहुंचते ही कहा-
मुझे मालूम था यह
फेल होगा. कभी किताब खोल कर एक घंटा भी तो नहीं पढ़ता. बच्चे के
मां बाप को बुरा लगा, पर वह
चुप रहे.पर इस बार अलगू को पड़ोसियों ने सबक सिखाने की
सोंची. वह मौके की तलाश में थे ही कि,
कुछ ही दिनों बाद मौका मिल गया. गांव के ही
एक आदमी की गाय चोरी हो गई.लोग संवेदना जताने
गए.अलगू भी गये. आदत के अनुसार अलगू
से रहा नहीं गया. पहुंचते ही बोले- मुझे मालूम था, इतना
कहना था कि लोगों ने एक
साथ पुलिस की ओर देखते हुए कहा- गाय की चोरी की मालूमात इन्हें ही
थी. उन्होंने
खुद ही कहा है. इन्हें गिरफ्तार कर लीजिए. पुलिस ने तुरंत अलगू के हाथ में
हथकड़ियां
डाल दी. इससे पहले अलगू कुछ समझ पाते पुलिस ने उठाकर उन्हें जीप में डाल
दिया.
अलगू ने सफाई
देनी चाही पर पुलिस ने डांटा.
जो भी मालूम है थाने में चल कर बताना. अलगू की बोलती बंद.
बहादुरी
एक पुराने जमीदार थे शिव प्रताप
सिंह. एक लम्बे अर्से बाद उनके बेटे को पुत्र हुआ था. अपने नाती के साथ वे बेहद
खुस थे.वे ज्यादातर समय उसके साथ बिताया करते. वे उसे अक्सर अपने बीते दिनों के
रुतबे की कहानियाँ सुनाया करते थे.जमीदारी तो रही नहीं,पर वे अब भी खुद को जमींदार
ही समझते थे. अपने नाती को अक्सर अपनी बहादुरी की कहानियाँ सुनाया करते. शिकार की
बातें करते और जर्मनी की बनी हुई अपनी प्रिय पिस्तौल, जो हमेशा अपने पास रखते थे.
अक्सर अपने नाती को दिखाते हुए गर्व से कहते- भारत में बहुत कम लोगों के पास ये
पिस्तौल होगी.सबसे पहले जर्मनी से मैंने ही मंगाया था. अक्सर उसकी खूबियाँ बताते,
ट्रिगर पर हाथ रखकर बताते कि इसे दबाने पर गोली चलती है,पर चलाते कभी नहीं. नाती
चलाकर दिखाने की जिद करता, पर हर बार दादा जी किसी न किसी बहाने टाल देते.एक दिन
दादा जी पिस्तौल तख्ते पर रख, पास बनी चौकी पर नहाने चले गये. उसी समय नाती घर से
बाहर आया और तख्ते पर रखी पिस्तौल देख बेहद खुस हुआ. उसने पिस्तौल झट से उठा ली और
चौकी पर नहा रहे दादा जी पर तानते हुए बोला- दादा जी. नाती के हाथ में अपनी ओर तनी
पिस्तौल देखकर दादा जी के होश उड़ गये.नाती बोला दादा जी गोली चलाऊं- दादा जी ने
हाथ हिला कर मना किया.बोलने की हिम्मत जवाब दे गयी थी. इतने में ट्रिगर टिक की
आवाज के साथ दबा और दादा जी धड़ाम से गिरे. आवाज सुनकर नौकर दौडकर बाहर आया.दादा जी
को चौकी पर बिठाते हुए पूछा - क्या हुआ मालिक ? दादा जी हडबडाते हुए बोले- नाती ने
मुझे गोली मार दी. नौकर ने हँसते हुए कहा- उसमें कभी गोली रहती भी है. फिर दादा जी
को याद आया कि पिस्तौल में तो गोली ही नहीं है.
सम्पर्क - 7718080978
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016
जिन्दगी को जीना
जब कोई गरीबी को जीता
है
तो वह जिंदगी को
सही मायनों में जीना सीखता है
गरीबी में जीना अर्थात
पिंजरे में जीने की कला
ठोकर खाकर भी
आगे बढ़ने की कला
भूखे रहकर भी मुस्कुराने की कला
न चाहते हुए भी
दुश्मन से हाथ मिलाने की कला
गरीबी में जीना मतलब
परिचितों और दोस्तों में फर्क जाने का मौसम
गरीबी में जीना मतलब
कमजोर दोस्तों के
पहचान का मौसम
अपनों और कथित अपनों
के
बीच की रेखा को देख
पाने का दिन
पत्नी, भाई,बहन,सगे-संबंधों के
जानने का पर्व
गरीबी,अपमान में खीझ और कम में
गरीबी हमें जिन्दगी जीने की पेशेवरकला सिखाती है
गरीबी हमें धोखे खाने और असफलता से बचने के
अनेक-अनेक हुनर सिखाती है
गरीबी धैर्य मापने का सर्वोत्तम बटखरा है
गरीबी प्रताड़ना मापने का सही यंत्र है
वास्तव में गरीबी हमें सच्चे मायनों में
जीने की कला सिखाती है
जो हमें अच्छे दिन सिखाने की कूवत नहीं रखते
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
खाली हाथ
काफी दिनों से हाथ
खाली है
पर हृदय तो भरा हुआ है
पर हृदय को देख सकें ऐसी दृष्टि कहां
सबको मेरे खाली हाथ दिखते हैं
कुछ चालाक परिचितों ने
बातों-बातों में
मेरी जेब का भी पता लगा लिया
उन्हें जेब भी खाली मिली
कुछ आगे बढ़कर
उन्होंने
मेरे खातों की भी हकीकत जान ली
सब-खाली ,सब-खाली बस उस दिन से
वे कभी नहीं दिखे
कई बार खोजा पर कभी नहीं दिखे
एक बार बाज़ार में दिखे भीपर
जरूरी काम बोल
कर निकल गए
मेरे खाली हाथ की चर्चा मेरे घर से लेकर
मोहल्ले और पूरे शहर में हो
रही है
दोस्त अब सिर्फ परिचित बताते हैं
और परिचित तो पल्ला ही झाड़ लेते हैं
कौन पवन
तिवारी ?
जो अक्सर चर्चा करते थे मेरी चर्चा,मेरी तारीफ
अब वह सिर्फ मेरे खाली हाथ
की चर्चा करते हैं
मेरे बारे में कभी न बात होती है न विचार होता है
मेरे नाम पर होती है तो बस मेरे खाली हाथ की चर्चा
और फिर उनके लिए जिम्मेदार मेरी तमाम
कमियाँ,बुराइयां गिनाई जाती हैं सिलसिलेवार
मेरी जेब खाली होने की खबर उड़ने से पहले
कभी-कभी ख्वाहिश होती थी अकेला एकांत मिले
अक्सर
कोई न कोई मिल ही जाता था
जब से मेरे हाथ खाली होने की खबर फैली है
अकेलापन कुछ इस
तरह सिर पर सवार हुआ है
कि लोग फोन पर भी बात करना पसंद नहीं करते
हजारों-हजार परिचितों, सैकड़ों दोस्तों में अब
मुश्किल से दस-पन्द्रह परिचित और चार-पांच दोस्त बचे हैं
कुल मिलाकर अब मेरी दुनिया सत्रह-अठारह लोगों तक है
जब तक हाथ भरे और जेबें भारी थी मुझे गुमान था
अपनी सामाजिकता पर, दोस्तों पर मैं
कभी-कभी बड़े गर्व से कहता
हजारों-हजारों लोग जानते हैं मुझे
पर आज कहने में तो आवाज़ लड़खड़ा
जाएगी
आज सच जानकर शर्मिंदा हूं
मुझे तो मुट्ठी भर लोग भी नहीं जानते
हाँ पर हम इस बात
की भी खुशी है कि
सत्तरह-अठारह लोग तो पहचानते हैं
अभी भी यह कह सकता हूं
इस शहर में कुछ लोग मुझे भी जानते हैं
कुछ दोस्त मेरे भी है
खाली हाथ ने मुझे
अपने आप से
साक्षात्कार कराया है
मुझे सच का दर्पण दिखाया है
मुझे अपनों से अब
जाकर मिलाया है
आभार है मेरे खाली हाथ
तूने माया की इस नगरी में
सच से मिलवाया है
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
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