चवन्नी का मेला

चवन्नी का मेला

यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

रविवार, 4 अक्टूबर 2026

कुछ जो अच्छा मिले तो पढूँ मन लगा

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कुछ जो अच्छा मिले तो पढूँ मन लगा जोड़ ख़ुद को सकूँ उस कथा भाव से एक दिन पुस्तकालय में संयोग से मिल गयी एक पढ़ने लगा चाव से   उसकी प्र...
गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026

उल्लू का पट्ठा

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सुना था ! फलाने शेर की औलाद बने फिरते हैं! मग़र जब मिला तो, लगा कि ये तो पट्ठे हैं ! और पता किया तो, मालूम हुआ कि सचमुच पट्ठे ह...
सोमवार, 21 सितंबर 2026

राम राम राम राम राम सीता राम

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राम  राम  राम  राम   राम   सीता राम राम जी के नाम से बनेंगे बिगड़े काम   आंजनेय जपते हैं जिनको सुबह शाम आंजनेय   होते   वहाँ   जहाँ  ...
गुरुवार, 3 सितंबर 2026

हाय क्यों ये विदाई के दिन आते हैं

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जिसको पाला दुलारा नयन में रखा जिसको हर हाँक अपने बयन में रखा   पापा कहती तो फूले समाता न था  बेटी कह कह के जिसको अघाता न था   उस...
शनिवार, 22 अगस्त 2026

तेरी मेरी कहानी है

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  बिगड़ी बिगड़ी कहानी है चार आँखों में पानी है धोखा छल है मिला दोनों को मैं न राजा तू रानी है   एक जैसी कहानी है तेरी मेरी कहा...
2 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 6 जुलाई 2026

बरखा झरर - झर बरस रही है

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बरखा   झरर - झर   बरस   रही है मन   की सूखी बगिया तरस रही है काश ऐसा हो कि गीला मन हो जाए मन कचोटे सारी दुनिया हरस रही है   दिन मह...
शनिवार, 4 जुलाई 2026

#मौसम

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वक़्त बदला बदल गया मौसम खोजता हूँ, कहाँ   गया मौसम दुःख की आंधी सी अचानक आयी सुख का तिनका भी ले गया मौसम   क्या कहूँ, कैसा हुआ है म...
शुक्रवार, 12 जून 2026

मुझको सुनती तो और कुछ लिखती

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मुझको सुनती तो और कुछ लिखती उम्र तुम्हारी कसम से बस हँसती इससे अच्छा बनाती बातें तुम जैसी दिखती हो और कुछ दिखती   तुमको कुछ याद कु...
शुक्रवार, 5 जून 2026

दिल दुखाते हुए जा रही

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दिल दुखाते हुए जा रही ज़िंदगी - ज़िंदगी ना रही रोज़ ताने दिये जा रही ज़िंदगी – ज़िंदगी ना रही   दुःख भरा बीतता रात दिन ज़िंदगी जा रह...
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जन्म-1982 अम्बेडकरनगर ,उत्तर प्रदेश. गत 18 वर्षों से मुंबई में निवास.12 वर्ष की उम्र से लेखन ,पहला

पवन तिवारी
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
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