गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026

उल्लू का पट्ठा



सुना था !

फलाने शेर की औलाद

बने फिरते हैं!

मग़र जब मिला तो,

लगा कि ये तो पट्ठे हैं !

और पता किया तो,

मालूम हुआ कि

सचमुच पट्ठे हैं मग़र,

अफ़सोस हुआ कि

उल्लू के पट्ठे हैं !

फिर भी विश्वास नहीं हुआ

उल्लू के पट्ठे हैं तो,

कैसे इतने हट्टे कट्टे हैं ?

फिर पता किया तो,

मालूम चला

रात में चोरी करते हैं!

हराम का माल हड़पते हैं,

तभी इतने हट्टे कट्टे हैं !

फिर ध्यान आया कि

उल्लू तो रात में ही

सारा कर्म करते हैं;

फिर शक हुआ कि

उल्लू आदमी के जैसे

कैसे दिखते हैं ?

फिर किसी ने

वह कहावत सुनाई

अस्सी कोस पर मेरा गांव

तुम कैसे जाने उल्लू नाँव ?

फिर उत्तर मिला

तुम्हारे करम से !

तब जाकर

मुझे विश्वास हुआ कि

यह सचमुच पट्ठा है

और उल्लू का ही है !

 

पवन तिवारी

११/१०/२०२६

 


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