बचपन
में दीदी संग कैसी थी बीती
आओ
बताऊं तुमको कैसी थी दीदी
पूरे
गाँव गोद ले घुमाती थी दीदी
अपने
फ़्राक से मेरी नाक पोछ देती
मेरे
लिए औरों से लड़ जाती दीदी
भइया
भइया कहके दुलराती थी दीदी
आओ
बताऊं तुमको कैसी थी दीदी
आरती
उतार के लगाती टीका दीदी
राखी
बाँध अक्षत छिड़कती थी दीदी
दूध
जला पेड़ा बनाती थी दीदी
राखी
पर हमको खिलाती थी दीदी
आओ
बताऊं तुमको कैसी थी दीदी
खाना
छोड़ रूठ जाऊं दौड़ी आती दीदी
अपनी
टॉफी देकर मनाती थी दीदी
घाव
लगे मुझको तो रोती थी दीदी
हल्दी
- प्याज पीसकर लगाती थी
आओ
बताऊं तुमको कैसी थी दीदी
घट
जाए खाना समझाती थी दीदी
अपना
हिस्सा हमको खिलाती थी दीदी
गरम
गरम फूंक कर खिलाती थी दीदी
बाबू
भइया कहके बहलाती थी दीदी
आओ
बताऊं तुमको कैसी थी दीदी
पाठशाला
हमको पहुँचाती थी दीदी
बस्ता
भी साथ में उठाती थी दीदी
सर
पे तेल, काजल लगाती थी दीदी
कभी
कभी अम्मा बन जाती थी दीदी
आओ
बताऊं तुमको कैसी थी दीदी
हाथ
पकड़ मेला घुमाती थी दीदी
मूंगफली
चाट खिलाती थी दीदी
तीखा
लगे आँसू गिरे डर जाती दीदी
अँजुरी
से पानी पिलाती थी दीदी
आओ
बताऊं तुमको कैसी थी दीदी
झगड़ा
होता मुझसे मार खा लेती दीदी
उल्टा
आकर मुझको मनाती थी दीदी
अम्मा
नहीं पर अम्मा जैसी थी दीदी
बाऊ
अम्मा सबकी दुलारी थी दीदी
अब
समझे बचपन में थी कैसी दीदी
पवन
तिवारी
२२/०५/२०२६
(
बड़की दीदी को समर्पित कविता )