कैसे
- कैसे लोग आये
ज़िन्दगी
में जोग आये
पकड़
करके हाथ मेरा
दूर
जाकर छोड़ आये
रास्ते
में जल्दी जल्दी
बड़े
- छोटे मोड़ आये
कितने
ही राही मिले औ
कितने
रिश्ते जोड़ आये
इन्हीं
रिश्तों के सहारे
कष्ट
कितने भोग आये
उस
डगर से बच तो आये
किन्तु
कितने रोग लाये
जिंदगी
को ओढ़ना था
और दुःख
को ओढ़ आये
रिश्ते
जो भी खून के थे
सारे
हमको छोड़ आये
ज़िन्दगी
जाने लगी जो
पास
उसके दौड़ आये
मृत्यु
से उसका मिलन था
साथ
खुद को जोड़ आये
पवन
तिवारी
०८/१२/२०२५
ऐसे ही लोग आते हैं आजकल क्या कहें और।
जवाब देंहटाएंसादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शनिवार ३ दिसम्बर २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
नववर्ष मंगलमय हो।
क्षमा चाहेंगे,कृपया ३ दिसम्बर को ३ जनवरी पढ़े।
हटाएंसादर।