चवन्नी का मेला

चवन्नी का मेला

यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

रविवार, 23 नवंबर 2025

कैसे कहूं अम्मा की याद नहीं आती

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अम्मा राजा बाबू बेटा कहकर खिलाती कैसे कहूं अम्मा   की   याद नहीं आती ?   गर्मी   में   आंचल   का     पंखा  बनाती जाड़े   में   आंचल...
मंगलवार, 18 नवंबर 2025

ज्यादातर की ज़िंदगी

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  पुस्तकों को करीने से सजा के जो रखता था वही अब ज़िन्दगी में तिनकों जैसा बिखरा है आपसी संबंधों को ज़मा करके जो रखता था आज वही हर जगह...
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शुक्रवार, 7 नवंबर 2025

स्वार्थ ने धृतराष्ट्र को अंधा किया

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स्वार्थ ने   धृतराष्ट्र   को अंधा किया नाम को इतिहास     में गंदा किया स्वार्थ का वो क्रम है बढ़ता जा रहा लोगों    ने    संबंध    को   ...
शनिवार, 25 अक्टूबर 2025

प्रेम की छाँव में राम की चाह में

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प्रेम की छाँव में राम की चाह में जानकी आ गयी गौरी की राह में गौरी ने पाया जब जानकी को शरण याद आया उन्हें अपना भी आचरण प्रेम में ...
बुधवार, 15 अक्टूबर 2025

तू किसी और की हो गयी

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तू किसी और की हो गयी ज़िन्दगी यूँ लगी खो गयी था लगा तेरे बिन कुछ नहीं तू गयी ज़िन्दगी तो गयी   स्वप्न की रागिनी सो गयी कीमती सबसे ...
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गुरुवार, 18 सितंबर 2025

ज़िन्दगी अब झर रही है

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ज़िन्दगी अब झर रही है चित्र धुँधले   दिख रहे हैं और   कुछ   साथी हमारे देख   हमको   हँस रहे हैं   जो भी साथी हँस रहे हैं वो भी उत...
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शनिवार, 30 अगस्त 2025

घबराने से विचलन होगी

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घबराने से विचलन होगी निज पथ से भी भटकन होगी   जिन दुःख ने हैं साहस तोड़े आओ उनकी बाँह मरोड़ें दुःख कितना भी दाब बनाये धमकी का वह म...
शनिवार, 23 अगस्त 2025

उर सरिता सा कल कल बहता

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अपने हिय का हाल कहूँ क्या जो अक्सर धक धक करता था उस हिय का स्वर बदल गया है उर सरिता सा कल कल बहता प्रेम की भाषा सा कुछ कहता उर सरि...
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बुधवार, 16 जुलाई 2025

सभी मेरे प्रश्नों के तुम ही थे हल

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सभी  मेरे     प्रश्नों    के   तुम  ही  थे हल तुममें ही अपना मुझे दिखता था कल परिचित तो बहुत   एक अपने थे तुम अपने ही   ने अपने से कर ...
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गुरुवार, 26 जून 2025

गौण सा पात्र हूँ मैं

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गौण सा पात्र   हूँ   मैं,   उपन्यास है एक   रेखा हूँ लक्षण हूँ बस , व्यास है किंतु व्यक्तित्त्व इनसे भी मिलकर बने डूबते को तो   तिनकों...
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जन्म-1982 अम्बेडकरनगर ,उत्तर प्रदेश. गत 18 वर्षों से मुंबई में निवास.12 वर्ष की उम्र से लेखन ,पहला

पवन तिवारी
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
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