चवन्नी का मेला

चवन्नी का मेला

यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

सोमवार, 25 अप्रैल 2022

भोर नहीं अब बतियाती है

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भोर नहीं अब बतियाती है रात नहीं   हँसकर आती है तुलसी कब की सुख गयी है दीपक   में   केवल   बाती है     थोड़ा – थोड़ा   रोज   मरा हूँ ...

इस बदन में

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इस बदन में जगत के सभी जोग हैं ये बदन जोगी है इसमें सब जोग हैं सच के अंकुश से संचलित आचरण अन्यथा इस बदन में ही सब रोग हैं   हैं ये ...

युद्ध चल रहा अधिकारों का

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युद्ध चल रहा   अधिकारों का समय चल रहा प्रतिकारों का ऐसे   में   है     शिथिलता   वैरी काल चल   रहा ललकारों का   चारो दिशा स्वार्थ ...

कुछ करो ऐसा कि

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कुछ करो ऐसा कि जग   में राहत रहे हिय किसी का कभी भी न आहत रहे बीज   बोते    चले    जाइए    स्नेह    के अंकुरित अनवरत होती   चाहत   रहे...

दुःख से भरे हैं

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दुःख से भरे हैं   सुख प्यासे हैं चेहरे     बहुत       रुआँसे     हैं जीवन   अंदर     खोजें   बाहर गाँव   से    नगर    तलाशे    हैं ...
रविवार, 24 अप्रैल 2022

नव वर्ष की शुभकामना है

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मुदित हूँ नव   वर्ष   की   शुभकामना है सकल जन को वर्ष भर शुभकामना है प्रकृति का सम्मान हो सब स्वस्थ होवें सबका हो कल्याण शुभ शुभकामना ...

प्यार करते ही वो

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प्यार करते   ही   वो   और   प्यारा   हुआ ये अलग   बात   कि   वो   किनारा   हुआ   थोड़ा हट सा गया जग से कट सा गया किन्तु इक दिल का सबस...

नैतिकता का हुआ विसर्जन

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नैतिकता  का  हुआ   विसर्जन करते  सब  स्वारथ का अर्जन सत्य  पड़ा  चुपचाप   अकेला चारो   ओर     झूठ  का   गर्जन   हड़प भाव औ   भाव में...
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जन्म-1982 अम्बेडकरनगर ,उत्तर प्रदेश. गत 18 वर्षों से मुंबई में निवास.12 वर्ष की उम्र से लेखन ,पहला

पवन तिवारी
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
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