चवन्नी का मेला

चवन्नी का मेला

यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

मंगलवार, 27 जुलाई 2021

मेरे अलउदीपुर

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  मेरे अलउदीपुर फिर से तेरा साथ मिला खुद पे शर्मिंदा हूँ जो हँस के तेरा हाथ मिला साल दर साल के शिकवे तेरे बकाया हैं तुझसे मिलता हूँ तो लगता ...
शनिवार, 17 जुलाई 2021

सोचते-सोचते दिन

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सोचते - सोचते  दिन  गुजर  जाते हैं रूप  को  देख  करके  मचल जाते हैं उम्र इक ऐसी  होती भी  जीवन  में है सोचे बिन भी बहुत कर गुज़र  जाते ...

झूठ से रिश्ते

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झूठ से रिश्ते   बिगड़ते   जा   रहे हैं सच की नज़रों से उतरते जा रहे हैं छल गये खुद ही   थे छलने जा रहे थोड़ा - थोड़ा अब वो गलते जा रहे हैं...
शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

तुम्हें चाहने वाले

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  तुम्हें चाहने वाले भी सरकार मिलेंगे उनमें से कुछ एक दिनी अखबार मिलेंगे स्वारथ वाली नज़रों को पहचान सको तो हो विलम्ब पर तुमको सच्चे प्...
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ऊपर एक रिश्ता सबसे है

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ऊपर एक रिश्ता सबसे है होश संभाला ये तब से है इसी से सब कुछ साझा करता मित्र का क़द ऊँचा नभ से है   हमको भी कुछ मित्र मिले हैं जिनस...
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जन्म-1982 अम्बेडकरनगर ,उत्तर प्रदेश. गत 18 वर्षों से मुंबई में निवास.12 वर्ष की उम्र से लेखन ,पहला

पवन तिवारी
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
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