चवन्नी का मेला

चवन्नी का मेला

यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

सोमवार, 21 जून 2021

मैं हूँ रंग

›
मैं हूँ रंग तो तुम पिचकारी कागज़ कलम सी अपनी यारी नाव और पतवार सा रिश्ता इक दूजे पर अपनी उधारी   तुम बिन मेरी अधूरी कहानी मैं हूँ...
गुरुवार, 17 जून 2021

गीतों को झुठलाने वालों

›
गीतों को झुठलाने वालों गीतों से ही धाम मिलेगा पीड़ा के पाँवों को मेरे गीतों से आराम मिलेगा लौट के एक दिन आओगे तुम धन की खातिर त्यागने वाल...

देके मुझे धोखा तुम

›
देके मुझे धोखा तुम धोखा ही पाओगे धोखे को लेकर बताओ कहाँ जाओगे   जिसके लिए धोखा मुझे दे रही हो सच सच बताओ क्या तुम सही हो   ज़िस्म...
बुधवार, 16 जून 2021

तुम आत्महत्या मत करना

›
तुम आत्महत्या मत करना! क्योंकि , मैंने भी आत्महत्या नहीं की! जब दुनिया ने , मेरे अपनों ने , भेजा था मेरे पास आत्महत्या को , तो म...

सच्चा प्रेम तो धवल - धवल है

›
सच्चा प्रेम तो धवल - धवल है धड़कन की गति   गंगा जल है ध्यान लगाओ   हिय की भाषा यमुना की कल कल कल कल है   यदि सच पावन प्रेम हो ऐसा ...

हे बादल! जब तुम गाते हो

›
हे बादल जब तुम गाते हो जल का स्वर तुम बरसाते हो जग कहता उसे बरखा रानी गाकर तुम खुश कर जाते हो   जग कल्याण हेतु तुम गाते ऐसा ह्रद...

आशाओं तुम गीत सुनाओ

›
आशाओं तुम गीत सुनाओ साहस   मेरी   बाँह बढ़ाओ मैं हँसते हुए   बढ़ना चाहूँ धीर ह्रदय को तुम समझाओ   दुःख तुम गीत ख़ुशी के गाओ हे तनाव...

तुम जो आओ बारिशों सा

›
तुम जो आओ बारिशों सा झम-झमा झम और गाना पायलों सा छम – छमा - छम प्रेम   का   आना   सदा ही   हर्ष   देता है किन्तु थोड़ा रूठना भी डम - डम...
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

जन्म-1982 अम्बेडकरनगर ,उत्तर प्रदेश. गत 18 वर्षों से मुंबई में निवास.12 वर्ष की उम्र से लेखन ,पहला

पवन तिवारी
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.