चवन्नी का मेला

चवन्नी का मेला

यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

मंगलवार, 2 जून 2020

बीतना

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मैं चाहता हूँ ज़िन्दगी मेरे साथ बीते, मुझसे बतियाते हुए ; मेरा और अपना सब कुछ साझा करते हुए. किन्तु वह कट रही है, किसी और के स...

पतझड़ में फूल

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पतझड़ में भी फूल खिले हैं जंगल में भी   मीत मिले हैं कभी-कभी कुछ लोगों को तो गैरों से   भी   गिले   रहे हैं रोना भी   सुख दे जात...

तुझको चाहा था

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तुझको चाहा था तुझको चाहूँगा पर   कोई   वादा   न निभाऊंगा प्यार   होकर   भी   रहेंगे झगड़े तेरी   तरह   तुझे    तड़पाऊंगा प्यार कब...
शुक्रवार, 29 मई 2020

जान जाके भी नहीं जाती है

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जान   जाके भी नहीं जाती है देख   तस्वीर   लौट   आती है बहुत से हुस्न   इधर   देखे हैं बात तुझसी मगर न आती है सोचता    हूँ   तुझ...

बुरे समय में प्रेम

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अच्छे समय में अधिक लोग करते हैं तुम्हें प्रेम ! यह झूठ है सफेद से भी ज्यादा क्योंकि जितना था मुझे अनुमान वे सारे अनुमान , ध्वस्त कर...
रविवार, 24 मई 2020

हे गरीब

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हे गरीब ! तुम गरीब रहो. हम तुम्हें दिखाएँगे सुंदर मोहक स्वप्न गरीबी में ही सपने देखने का मिलता है वास्तविक सुख जिन्हें देखकर मच...

सर्वश्रेष्ठ प्रेम

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लोगों से सुना है आप ने भी सुना होगा बस एक चीज है जो बांटने से बढ़ती है ‘विद्या’ परन्तु यह ही सही नहीं है प्रेम भी बाँटने से बढ़ता...
रविवार, 17 मई 2020

काल

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सारी शेखियाँ बिखर गयी. सारी शोखियाँ गुम गयी. खोज रहे ज़िंदगी को जाने किधर गयी. अपने चले गये. पराये चले गये हम इधर उधर के चक्कर...

साथ

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किसी का साथ होना बेहद महत्वपूर्ण होता है आप के लिए हानिकारक, दुखदाई सुखदाई या अवलम्ब होता है. अक्सर साथ होना भरोसा देता है ज़िन्...
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जन्म-1982 अम्बेडकरनगर ,उत्तर प्रदेश. गत 18 वर्षों से मुंबई में निवास.12 वर्ष की उम्र से लेखन ,पहला

पवन तिवारी
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
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