चवन्नी का मेला

चवन्नी का मेला

यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

सोमवार, 2 दिसंबर 2019

कहो गर कुछ तो

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कहो कुछ तो कुछ अरमान  निकले अपने अंदर का भी बियाबान निकले माना   कचरा   ही   सही   देखो   तो क्या पता हो   कि   सामान   निकले ...

मेरी निंदा के लिए

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मेरी निंदा के लिए ही मुझे सुनने वालों शुक्रिया मुझकों घमण्डी बहुत कहने वालों जहाँ भर में मेरी चर्चा तुम्हारे दम से है सदा आबाद रह...
मंगलवार, 26 नवंबर 2019

मौन भी प्रेम का

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मौन  भी  प्रेम  का   एक  अनुवाद है प्रेम है  साथ  तो  लगे  सब  साथ हैं हिय तो आज़ाद था हिय तो आजाद है प्रेम   से   जो   कहे   वो ह...
सोमवार, 25 नवंबर 2019

कैसे - कैसे बुद्धिजीवी

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कैसे - कैसे   बुद्धिजीवी   हो   रहे   हैं प्रश्न के उत्तर प्रश्न   से   दे   रहे हैं नौकरी की सड़क पे   घायल   सपन हैं चाह के कोमल...
रविवार, 24 नवंबर 2019

देखा सपन अनोखा है

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देखा   सपन    अनोखा है दाल   में   डूबा    चोखा है कैसे - कैसे   ख़याल आये दिल कहे प्रेम कि धोखा है बाहर - बाहर लम्बी बातें ...

गीत पुराने फिर गाने हैं

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गीत   पुराने     फिर     गाने हैं वे मौसम   हमें   फिर लाने हैं बातों - बातों में   हल निकले आपस   में   फिर बतियाने हैं गम  ...

रिश्तों के कितने चौराहे

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रिश्तों       के       कितने     चौराहे मार्ग दिशा भ्रम होने लगता कल जो अपना आज गैर का हर दिन छल सा होने लगता रिश्तों की मौलि...
गुरुवार, 21 नवंबर 2019

कुछ सँवरते- सँवरते- सँवरते गये

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कुछ   सँवरते- सँवरते- सँवरते   गये कुछ बिखरते- बिखरते-बिखरते गये जितनी चाहत किये जिन्दगी के लिए उतना   मरते   ही मरते ही मरते गये...
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जन्म-1982 अम्बेडकरनगर ,उत्तर प्रदेश. गत 18 वर्षों से मुंबई में निवास.12 वर्ष की उम्र से लेखन ,पहला

पवन तिवारी
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
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