चवन्नी का मेला

चवन्नी का मेला

यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

गुरुवार, 9 अगस्त 2018

बिन प्रेम के रहना भी है कला

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बिन प्रेम के रहना भी है कला प्रेम में पड़के सहना भी है कला प्रेम पावन मिले जिन्दगी में कभी उसका सम्मान करना भी है कला प्रेम ह...
मंगलवार, 7 अगस्त 2018

गाँव से चलके शहर क्या आया

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गाँव से चलके शहर क्या आया जैसे गाँव को भूल गया बरगद, पीपल, आम के नीचे वाली   छाँव को भूल गया जिन गाँवों में र...
रविवार, 5 अगस्त 2018

प्रात दोपहर संध्या रात

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प्रात दोपहर संध्या रात चारो  प्रहर  बात ही बात ये तो तब है जब सुखमय सब बरना बिगड़े हर इक बात हिन्दू, मुस्लिम सिख इसाई प्रे...
शुक्रवार, 3 अगस्त 2018

ज़िंदगी में सभी के तो गम आये हैं

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ज़िंदगी  में सभी के  तो  गम  आये हैं किसके ज्यादा किसी के तो कम आये हैं ये  ढलना , ये  चढ़ना  भी  है ज़िन्दगी...
बुधवार, 1 अगस्त 2018

ख़ास आम सबके

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ख़ास आम सबके दुखों का घड़ा हूँ मैं क्या कहूँ नयी उमर का अब्बा हूँ  मैं सुनके  सभी के ग़म दीवार हो गया खुशियो...
मंगलवार, 31 जुलाई 2018

मित्र, मित्र से भी जलता है

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राग द्वेष का भी क्या कहना दोनों भी जीवन का गहना मित्र, मित्र से भी जलता है मुझसे बेहतर उसका रहना ज़्यादा बातें अपनी कहना क...
रविवार, 29 जुलाई 2018

जग की प्रिय बतकही

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जग की प्रिय बतकही है निंदा बहुतों  का  रस रत्न है निंदा पर जो लक्ष्य को लेकर दृढ़ हैं उनके   आगे  ...
रविवार, 22 जुलाई 2018

जब भीषण अवरोधों से

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जब भीषण अवरोधों से कोई आम आदमी उबरेगा तोड़ सभी दुःख के बंधन जब आम आदमी गरजेगा प्रेरणा के नव नायक का जब अभिनंदन करना होगा ...
शनिवार, 21 जुलाई 2018

प्यार की लहर आये बता दीजिए

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प्यार की लहर आये  बता दीजिए थोड़ा - थोड़ा सही पर जता दीजिए है ज़माना  नया हम नये लोग हैं  नये  अंदाज़  में  ही  सता दीजिए...
गुरुवार, 19 जुलाई 2018

हमने प्यार कर लिया

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हमने प्यार कर लिया क्या गुनाह कर लिया ऐतबार  कर  लिया क्या गुनाह कर लिया उम्र  ही  ऐसी  है  दिल  बहक जो गया उसन...
बुधवार, 18 जुलाई 2018

तुम्हें देखूँ जब भी

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तुम्हें देखूँ जब भी तो लगता ऐसे कि जैसे मेरा सब तुम्हारे लिए है देखा सपन प्रेम का जो भी मैंने ये नैनों का सपना तु...
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जन्म-1982 अम्बेडकरनगर ,उत्तर प्रदेश. गत 18 वर्षों से मुंबई में निवास.12 वर्ष की उम्र से लेखन ,पहला

पवन तिवारी
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
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