चवन्नी का मेला

चवन्नी का मेला

यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

मंगलवार, 26 दिसंबर 2017

माना कि ख़तरा यहीं है

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माना कि ख़तरा यहीं है मगर ख़ुदा भी तो यहीं है माना कि झूठ बहुत है यहाँ मगर सच भी तो यहीं है नफरत की ही...
सोमवार, 25 दिसंबर 2017

गरीबी में दोस्त समरथ बाज़ार हो गये

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गरीबी में दोस्त समरथ बाज़ार हो गये हम  उधारी  की  तरह  बेकार हो गये प्यार के लहजे सभी इतिहास हो गये लहजा न होके  तेवर  रौबदार ह...

अधूरी बात, अधूरा प्यार बहुत तड़पाते हैं

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अधूरी  बात , अधूरा  प्यार  बहुत   तड़पाते  हैं जिन्हें मनाओ जितना ही उतना तरसाते हैं उनके प्रेम में पागल हैं आभास उन्हें हो ...
रविवार, 24 दिसंबर 2017

तुम्हें चाहता हूं ,तुम आओ, सुबह की धूप जैसी

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तुम्हें चाहता हूं , तुम आओ , सुबह की धूप जैसी मगर गर दोपहर की धूप हो तो, मत आना थोड़ा ठहरना, सुस्ताना छांव में, थोड़...
गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

तेरे कदमों में गिरुं और उठूँ नज़रों में

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मेरी  चाहत  नहीं  पूरी  दुनिया  मैं  पाऊँ उतना  ही  दे  प्रभू  जितना  समेट  पाऊँ देखकर   दुनिया   ये   हसरत   ...
बुधवार, 20 दिसंबर 2017

लोग कहते हैं अब गुस्सा नहीं होते हैं हम

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लोग कहते हैं अब गुस्सा नहीं होते हैं हम अब मेरी औलादें हैं पहले वाले नहीं हैं हम पीठ पर हरदम लदी रहती थी ज...
रविवार, 17 दिसंबर 2017

बड़ा फरेब की, वादों में भी भरमायी दुनिया

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बड़ा फरेब की, वादों में भी भरमायी  दुनिया मगर इन हरकतों ने ही सही दिखायी दुनिया    समझ  आयी  मुझे  इक  उम्र से पहले  दुनिया ...
शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

जाने किस बात से आती उसे हँसी होगी

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जाने किस बात से आती उसे हँसी होगी ज़ख्म गहरा होगा जिसमें वो धँसी होगी जिसमें न कोई खुशियाँ ...

कोई भी हो किसी का घर आसमां नहीं - ग़ज़ल

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कोई भी हो किसी का घर आसमां नहीं हो सकता गुज़ारा मगर बिन जमी नहीं माना कि इस शहर में नये आदमी हैं हम लेकिन ये सच नहीं कि यहाँ आद...
मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

मैंने भविष्य देखा

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इधर कई दिनों से भविष्य के बारे में सोच रहा था गंभीरता से कि तभी सामने से आता दिखा विशालकाय भविष्य मैं कर गया उसमें प्रवेश, मैं...
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जन्म-1982 अम्बेडकरनगर ,उत्तर प्रदेश. गत 18 वर्षों से मुंबई में निवास.12 वर्ष की उम्र से लेखन ,पहला

पवन तिवारी
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
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