चवन्नी का मेला

चवन्नी का मेला

यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

शनिवार, 12 अगस्त 2017

कठिन और सरल

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कठिन शब्दों में कहना सरल है बहुत सरल शब्दों में कहना कठिन है बहुत धीर - गंभीर होना सरल है बहुत व्यक्ति का सरल होना कठिन है बहुत ...
मंगलवार, 8 अगस्त 2017

तुम मिली

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हकीकत में तो उस दिन वो मिली थी पर उसके अगले रोज ख्वाब में कोई और मिली थी कहानियों में जिसे मैंने पढ़ा था छुवा था, महसूस...

प्रात

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भोर हुई आया फिर  प्रात चिड़ियों का कलरव भी साथ शनैः शनैः दिनकर भी साथ हुआ मनोरम जग ...
सोमवार, 7 अगस्त 2017

किरायेदार

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बहुत सारे शब्दों में एक शब्द है किरायेदार क्या कभी आप ने सुना है किरायेदार के बारे में हाँ गाँव में कम मिलते हैं शहर जाओ थोक में...
रविवार, 6 अगस्त 2017

जेठ की दोपहर में भटक था रहा

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जेठ की दोपहर में भटक था रहा था पसीनें की बूंदों से भीगा ये तन कि तभी तुम पे मेरी नज़र जा पड़ी आके यूँ ढक गया,धूप को जैसे घन ...
शनिवार, 5 अगस्त 2017

पहले एक बार ज़िंदा तो हो जाओ

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जिन्दगी जीना चाहते हो तो ये उदासी छोड़ो थोड़ा मस्ती में हो जाओ  दोस्ती में य...
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जन्म-1982 अम्बेडकरनगर ,उत्तर प्रदेश. गत 18 वर्षों से मुंबई में निवास.12 वर्ष की उम्र से लेखन ,पहला

पवन तिवारी
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
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