चवन्नी का मेला

चवन्नी का मेला

यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

काम-लोलुप

›
रूप और देह   की लालसा है जिन्हें प्रेम खुद उनसे मिलना नहीं चाहता प्रेम     श्रद्धा   समर्पण है   परमात्मा रूप   की   लालसा   य...
सोमवार, 30 जनवरी 2017

आवारा लड़का

›
रात के 11: 30 बज रहे थे. कमल की अम्मा और बाऊजी बरामदे के बाहर आग के पास शांत बैठे थे.कड़ाक...
रविवार, 29 जनवरी 2017

दुखों को बाँटने से ही तुम्हारा दुःख ये कम होगा .

›
दुखों को बाँटने से ही तुम्हारा दुःख ये कम होगा . रखोगे बांधकर इसको यही दुःख जख्म कल होगा . अगर तुम दोस्त हो मेरे तो ये दुःख बाँट दो ...

विवादों के रिश्तेदार भंसाली और अब रानी पद्मावती

›
इधर दो दिनों से मीडिया में भंसाली छाये हुए हैं वह भी गलत कारणों से वे अक्सर विवादों में रहते हैं मीडिया में जगह पाने के लिए या दुर्भाग्य वश...
बुधवार, 25 जनवरी 2017

कुछ शेर ...मौका परस्ती भी क्या कमाल की चीज है

›
मौका परस्ती भी क्या कमाल की चीज है  कल तलक जो था गद्दार आज उसी की पहनी कमीज है बासी दाल भी जो माँग ले जाते थे कल तलक वही कहते हैं आप की...

ना वादा करूँगा,न इकरार करूँगा

›
ना वादा करूँगा,न इकरार करूँगा तुमसे प्यार करता हूँ बस प्यार करूँगा कल मिलूँगा या फिर परसों वरना मिलूँगा नरसों ना कोई वादा,बस मिल...
मंगलवार, 24 जनवरी 2017

गीत.....रात भर - रात भर तूँ जगाती रही

›
  मेरे प्रिय पाठक मित्रों ये गीत मैंने १५ वर्ष पहले मुंबई के ह्रदय नरीमन प्वाइंट के बस स...
सोमवार, 23 जनवरी 2017

माँ ना जाने उसको अक्सर क्या - क्या कहती है

›
माँ ना जाने उसको अक्सर क्या - क्या कहती है   मेरे कारण ना जाने वो क्या - क्या सहती है  माँ,भाई ,बहनें सबक...
1 टिप्पणी:
शनिवार, 21 जनवरी 2017

मोहब्बत की बहुत बातें जमाने भर से की तूने

›
मोहब्बत की बहुत बातें जमाने भर से की तूने मगर तूं ये बता खुद से मोहब्बत की कभी तूने मशवरे तूं जमाने भर को भर-भर रोज देता है कभी उन मशवरो...

कुछ मित्रता पर ताज़ा शेर

›
दोस्तों की जो देखी कारगुजारियाँ तो  दुश्मन बुरे नहीं हैं ये ख्याल आया  आजकल दोस्त कुछ इस अदा से मिलते हैं  कि दुश्मनों से दोस्ती को ज...
शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

इक प्यार में ही ऐसा करम होता है

›
                                                गीत इक प्यार में ही ऐसा करम होता है एक को घाव लगती है,दर्द दूजे को होता है  कि...

कुछ मुक्तक

›
इस धरती में पैदा हुआ मैं इसका लाल हूँ. जैसा भी हूँ मैं माँ तेरा बेटा कमाल हूँ  तुझे आँख उठा के जो कोई देखेगा माँ उसके लिए तो काल क्या...

चाहत

›
गीत  तुमने चाहा मुझे ये बड़ी बात है खूबियाँ मुझमें देखी बड़ी बात है सबने मुझमें तो बस दोष ही देखा...
गुरुवार, 19 जनवरी 2017

मैं नहीं बदला,बहुत कुछ बदल गया साहब

›
गज़ल      शहर में आकर बरसों गुज़र गया साहब   मैं नहीं बदला,बहुत कुछ बदल गया साहब  गाँव से शहर आया हुआ गँवार आदमी हूँ मगर शहर की ऐ...

मेरा ताज़ा कविता पाठ

›
मंगलवार, 10 जनवरी 2017

10 जनवरी विश्व हिन्दी दिवस पर विशेष लेख

›
10 जनवरी विश्व हिन्दी दिवस पर विशेष लेख विश्व में हिन्दी का स्थान  हिन्दी प्रेमी प्रति वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस   मना...
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

जन्म-1982 अम्बेडकरनगर ,उत्तर प्रदेश. गत 18 वर्षों से मुंबई में निवास.12 वर्ष की उम्र से लेखन ,पहला

पवन तिवारी
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.