चवन्नी का मेला

चवन्नी का मेला

यह ब्लॉग अठन्नी वाले बाबूजी उपन्यास के लिए महाराष्ट्र हिन्दी अकादमी का बेहद कम उम्र में पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकार,चिंतक,पत्रकार लेखक पवन तिवारी की पहली चर्चित पुस्तक "चवन्नी का मेला"के नाम से है.इसमें लिखे लेख,विचार,कहानी कविता, गीत ,गजल,नज्म व अन्य समस्त सामग्री लेखक की निजी सम्पत्ति है.लेखक की अनुमति के बिना इसका किसी भी प्रकार का उपयोग करना अपराध होगा...पवन तिवारी

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2016

घृणित राजनीति में मौत पर नेताओं के अलग - अलग सियासी पैमाने

›
घृणित राजनीति   में मौत पर नेताओं के अलग - अलग सियासी  पैमाने नेताओं और नेतागिरी  से जितना देश को फायदा नहीं हुआ उससे ज्यादा नुकसान हुआ है...

भारतीय पत्रकारिता के इतिहास पर एक दृष्टि

›
हमारे देश में पत्रकारिता का प्रारंभ 18वीं सदी के आखिरी दो दशकों में हुआ, परंतु यदि धार्मिक व पौराणिक कथाओं अथवा युग की बात माने तो शायद ...
मंगलवार, 2 फ़रवरी 2016

पत्रकारिता को मीडिया कहकर लज्जित न करें

›
मीडिया और पत्रकारिता के अंतर को जाने मित्रों आज पत्रकारिता शब्द के पर्याय, विकल्प या पत्रकारिता के स्थान पर एक दोयम दर्जे के औपनिवे...
गुरुवार, 28 जनवरी 2016

कुछ साहित्यिक दुनिया वाले आज़ादी के दीवाने

›
आज की     राजनीतिक     ऊष्मा     में अचानक नेता जी सुभाष पर जारी गोपनीय पत्रों ने     क्रान्तकारियों के जीवन ,   उनकी पीड़ा   ,   उपेक्षा...
सोमवार, 25 जनवरी 2016

देख लीजिये 16 कारसेवकों की लाशों पर खड़े इस नेता को

›
आज कर्पूरी ठाकुर की 91 वीं  जयंती के अवसर पर जो मुलायम सिंह जी ने कहा  वह  एक भारतीय के रूप में असहज कर गया . क्या कोई वरिष्ठ नेता  इतनी ऊं...
1 टिप्पणी:
मंगलवार, 29 दिसंबर 2015

भाजपा की एक मात्र सकारात्मक उम्मीद वरुण गांधी ...पर क्या भाजपा वरुण को मौका देगी

›
2016 - 17 में होने वाले विधानसभा चुनाव बीजेपी की बयार है या नहीं  और कांग्रेस में वापसी की ताकत है या नहीं  ये  पंजाब , असम, तमिलनाडु , प. ...
रविवार, 27 दिसंबर 2015

भाजपा के लिए ये आपसी नादानियाँ मंहगी न पड़ जाये

›
मोदी की साख पर सवाल शुरू... आने वाले दिनों में भाजपा के लिए अच्छे नहीं . बीजेपी  को कांग्रेस  वाली गलतियों से बचना होगा और  जो गलतियाँ हु...
3 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

chavanni ka mela : अटल का बदहाल बटेश्वर

›
chavanni ka mela : अटल का बदहाल बटेश्वर : अटल जी की वर्ष गांठ पर विशेष लेख अटल जी का बदहाल बटेश्वर मुम्बई, अटल जी वैश्विक शख्शियत हैं .उ...
सोमवार, 23 नवंबर 2015

हमारी सहिष्णुता का बेजा फायदा उठाया जा रहा है इतनी सहिष्णुता भी ठीक नही

›
आज आमिर खान के बयान ने मुझे  आवेश और ग्लानि से भर दिया , मुझे अपनी सहनशीलता या सहिष्णुता जो भी कहें ,पर शर्म आने लगी ,  कि हम इतने सहनशील क...
1 टिप्पणी:
रविवार, 15 नवंबर 2015

ये अहिंसा का देश कभी नहीं रहा हाँ उदार अवश्य रहा

›
मित्रों बिहार चुनाव जब से सम्पन्न हुए हैं भारतीय मीडिया और लेखकों, बुद्धिजीवियों में एक आत्मसंतोष दिखाई दे रहा है वे निढाल से हो गये हैं ...
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

जन्म-1982 अम्बेडकरनगर ,उत्तर प्रदेश. गत 18 वर्षों से मुंबई में निवास.12 वर्ष की उम्र से लेखन ,पहला

पवन तिवारी
12 वर्ष की उम्र से कविता , कहानी आदि का लेखन, विद्यालयीन प्रतियोगिताओं में भाषण गायन, अन्ताक्षरी, एकांकी आदि में प्रथम .लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता, कई पत्र ,पत्रिकाओं का सम्पादन, फिल्म लेखन, कई पुस्तकों का सम्पादन, अब तक चार उपन्यास ( अठन्नी वाली बाबूजी, त्यागमूर्ति हिडिम्बा, विद्रोही शुक्राचार्य, पतिव्रता वेश्या ) दो कहानी संग्रह (चवन्नी का मेला, पेड़ा बाबा की कृपा ) तीन कविता संग्रह ( काले अक्षर कविता और कवि, मैंने प्रेम बो दिया और बाल कविता संग्रह बचपन की प्रकृति) एवं एक अनुवाद प्रकाशित ! सीबीएसई बोर्ड के तीसरी और चौथी कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम में बाल कवितायें शामिल! आकाशवाणी पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर विशेष वक्तव्य, देश के सबसे बड़े भजन संकलन भजन गंगा का अतिथि सम्पादन, इंडियन प्रेस कौन्सिल की पहली स्मारिका का सम्पादन आदि
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.